प्रमुख समाचार
एम्बी वैली की नीलामी में दखल देने वाला जेल जाएगा : सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली,12/अक्टूबर/2017(ITNN)>>> बकाएदारों के पैसों को लौटाने में हो रही देरी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की पुणे में मौजूद एम्बी वैली की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की है। मगर इस नीलामी प्रक्रिया में सहारा समूह ने स्थानीय पुलिस को कानून व्यवस्था का हवाला देकर एक चिठ्ठी लिखी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट का कहना है कि नीलामी प्रक्रिया जब सर्वोच्च अदालत के आदेश से चल रही है तो कंपनी को पुणे पुलिस के एसपी (देहात) को कानून-व्यवस्था पर पत्र लिखकर मामले में दखल नहीं देना चाहिए था।

नीलामी प्रक्रिया में दखल देने वाला जाएगा जेल
खंडपीठ ने सख्त लहजे में कहा है कि अब अगर किसी ने भी एम्बी वैली की नीलामी प्रक्रिया में दखल देने या बाधा डालने की कोशिश की तो वह अदालत की अवमानना का दोषी होगा और उसे जेल भेज दिया जाएगा। सहारा समूह के नीलामी प्रक्रिया में दखलंदाजी करने के सेबी के आरोपों पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने गुरुवार को कहा कि सहारा समूह को अदालत की निगरानी में चल रहे कामकाज पर दखल देने की जरूरत नहीं।

जस्टिस रंजन गोगोई और एके सीकरी की खंडपीठ ने महाराष्ट्र के डीजीपी को निर्देश दिया है कि वह सुनिश्चित करें कि 48 घंटे के अंदर यह संपत्ति बॉम्बे हाईकोर्ट के ऋणशोधन करने वाले (लिक्विडेटर) अधिकारी को सौंप दी जाए। सर्वोच्च अदालत ने लिक्विडेटर अधिकारी को कहा कि वह बॉम्बे हाईकोर्ट के सिटिंग जज व मामले में कंपनी जज जस्टिस एएस ओका की सीधी निगरानी में नीलामी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाए।

वहीं,सेबी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने एसपी को लिखे पत्र का हवाला देते हुए कहा कि अब पुलिस ने संपत्ति को अपने कब्जे में ले लिया है। जबकि सहारा समूह के वकील मुकुल रोहतगी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संपत्ति पर पुलिस को कब्जा नहीं दिया गया है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि उन्हें इस मामले में फिलहाल अवमानना का मामला नजर नहीं आता। उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च अदालत ने सेबी की अपील पर सहारा समूह के खिलाफ अदालत की अवमानना के आरोपों को खारिज कर दिया है।