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बातचीत की राह पर लौटेंगे भारत और चीन
नई दिल्ली,10/नवम्बर/2017(ITNN)>>> डोकलाम विवाद का समाधान निकालने के बाद भारत और चीन रिश्तों को सामान्य बनाने की नई कोशिश शुरू कर रहे हैं। कोशिश फिलहाल दो स्तरों पर होने जा रही है। एक तो अगले हफ्ते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच फिलीपींस की राजधानी मनीला में बैठक होने के प्रबल आसार हैं। दूसरी तरफ दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की अगुआई में सीमा विवाद सुलझाने के लिए गठित विशेष समिति की बैठक की तैयारियां भी चल रही हैं। यह बैठक डोकलाम विवाद की वजह से टाल दी गई थी।

इसके अलावा अगले कुछ हफ्तों में विदेश मंत्री के स्तर पर भी द्विपक्षीय बातचीत होने वाली है। भारत-रूस-चीन की त्रिपक्षीय बैठक में भाग लेने के लिए चीन के विदेश मंत्री दिसंबर,2017 में भारत आ सकते हैं। मोदी और चिनफिंग मनीला में आसियान देशों की सालाना बैठक में हिस्सा लेने के लिए उपस्थित होंगे। कुछ अवसरों को छोड़ दिया जाए,तो जब भी ये दोनों नेता किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शिरकत करते हैं,तो द्विपक्षीय बैठक जरूर करते हैं। डोकलाम विवाद के दौरान भी हनोवर (जर्मनी) में समूह-20 देशों की बैठक के दौरान दोनों की मुलाकात हुई थी।

माना जाता है कि इसने विवाद को सुलझाने में मदद की थी। पिछले साढ़े तीन वर्षों में मोदी की चिनफिंग से संभवतः डेढ़ दर्जन बार द्विपक्षीय बातचीत हो चुकी है। माना जा रहा है कि दोनों नेता मनीला में आपसी बातचीत से द्विपक्षीय रिश्तों के मौजूदा तनाव को सामान्य बनाने का कोई रास्ता निकालेंगे। वैसे दोनों देश उन वजहों का स्थायी समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी वजह से 4000 किलोमीटर लंबी सीमा पर तनाव पैदा होते हैं। समाधान निकालने के लिए दोनों देशों ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर रखी है। अभी इसमें भारतीय पक्ष की अगुआई एनएसए अजीत डोभाल करते हैं।

चीनी पक्ष का नेतृत्व वहां के पोलित ब्यूरो में शामिल व स्टेट काउंसलर यांग यिची करेंगे। यांग यिची की अगुआई वाली टीम के साथ डोभाल की कई स्तरों की बात पहले भी हुई है। दोनों पक्षों के बीच अंतिम बैठक पिछले वर्ष बीजिंग में हुई थी। अगली बैठक इस वर्ष के मध्य में होनी थी। लेकिन,डोकलाम विवाद की वजह से यह नहीं हो सकी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने संकेत दिए कि अब यह वार्ता ज्यादा दिनों तक नहीं टाली जाएगी। उन्होंने बताया कि भारत और चीन के अधिकारी उच्चस्तरीय समिति की बैठक के लिए एक-दूसरे के संपर्क में हैं।