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आज टल सकती है तलवार दंपति की रिहाई
नई दिल्ली,13/अक्टूबर/2017(ITNN)>>> देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री बन चुके आरुषि हत्याकांड में हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी मिस्ट्री बनी हुई है. कल हाईकोर्ट ने तलवार दंपति को बरी किया था. गाजियाबाद की डासना जेल में बंद राजेश तलवार और नुपुर तलवार की आज रिहाई होनी थी. लेकिन आज ये रिहाई मुश्किल लग रही है. तलवार दंपति के एक वकील ने कहा,हाईकोर्ट से प्रमाणित कॉपी यानी आधिकारिक कॉपी नहीं मिली है,क्योंकि प्रक्रिया में वक्त लग रहा है. अगर आज शाम तक ये कॉपी नहीं मिलती है तो रिहाई के लिए सोमवार तक इंतजार करना होगा. दरअसल कल सेकंड सटरडे की वजह से कोर्ट बंद रहेगा और फिर रविवार की छुट्टी रहेगी.

क्या है हाईकोर्ट का फैसला?
हाईकोर्ट ने सीबीआई के सबूतों को नाकाफी माना और सबूतों के अभाव में तलवार दंपत्ति को कातिल मानने से इनकार कर दिया. जस्टिस बी के नारायण और जस्टिस ए के मिश्रा की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा है कि सीबीआई की दलील में दम नहीं है. वारदात के वक्त घर में सिर्फ राजेश और नुपूर तलवार थे इसलिए हत्या इन्हीं लोगों ने की ये साबित नहीं होता. हत्याकांड में कोई ठोस सबूत नहीं है, तलवार दंपति को संदेह का लाभ दिया जाता है.

सीबीआई के जज पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने परिस्थित जन्य साक्ष्यों के आधार पर ही फैसला सुना दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि हत्या की वजह को लेकर स्थिति स्पष्ट ही नहीं है. सीबीआई अदालत ने कानून के बुनियादी नियम की अनदेखी की है. हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि मानो जज को कानून की सही जानकारी तक नहीं थी, इसी वजह से उन्होंने कई सारे तथ्यों को खुद ही मानकर फैसला दे दिया जो थे ही नहीं. ट्रायल जज एक गणित के टीचर की तरह व्यवहार नहीं कर सकता. ट्रायल जज ने L 32 में जो हुआ उसे एक फिल्म निर्देशक की तरह सोच लिया.

अब सीबीआई क्या करेगी?
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सीबीआई ने कहा है कि पूरा फैसला पढ़ने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट में अपील पर फैसला करेंगे. आरुषि हत्याकांड की जांच
सीबीआई ही कर रही थी. जब आरुषि केस की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी उस वक्त अरुण कुमार ने सीबीआई की जांच टीम का नेतृत्व किया था. अरुण कुमार की फैसले पर प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा है कि तलवार दंपति को निर्दोष बताने वाले सबूत कोर्ट में पेश नहीं किए गए थे, अपने हिसाब से सबूत के मायने लगाए गए.

सीबीआई कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा
सीबीआई की विशेष अदालत ने राजेश-नुपुर तलवार दंपत्ति को अपनी बेटी आरुषि और घरेलू नौकर हेमराज के कत्ल का दोषी पाया था और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी. खंडपीठ ने तलवार दंपति की अपील पर सात सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और फैसला सुनाने की तारीख 12 अक्टूबर तय की थी.

सबसे चर्चित मर्डर केस?
पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले इस केस की कहानी 2008 में शुरू हुई थी. 16 मई 2008 को नोएडा के जलवायु विहार इलाके में 14 साल की आरुषि का शव बरामद हुआ. अगले ही दिन पड़ोसी की छत से नौकर हेमराज का भी शव मिला. केस में पुलिस ने आरुषि के पिता राजेश तलवार को गिरफ़्तार किया. 29 मई 2008 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी. 

सीबीआई की जांच के दौरान तलवार दंपति पर हत्या के केस दर्ज हुए. मर्डर केस में सभी पक्षों की सुनवाई के बाद सीबीआई कोर्ट ने 26 नवंबर 2013 को नुपुर और राजेश तलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई. सीबीआई के फैसले के खिलाफ़ आरुषि की हत्या के दोषी माता-पिता हाई कोर्ट गए और अपील दायर की. राजेश और नुपुर फिलहाल गाजियाबाद की डासना जेल में सजा काट रहे हैं.