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भारत की आर्थिक वृद्धि में गिरावट अस्थायी: विश्व बैंक ने जताया भरोसा
वाशिंगटन,06/अक्टूबर/2017(ITNN)>>> जहां भारत में आर्थिक विकास और इकोनॉमी को लेकर केंद्र सरकार को विरोधियों समेत खुद की पार्टी के नेताओं से आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है वहीं दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक संस्थाओं में से एक विश्व बैंक ने भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया है. विश्व बैंक ने भारत की आर्थिक वृद्धि में हाल ही में आई गिरावट को अस्थायी बताते हुए आज कहा कि यह मुख्य रूप से जीएसटी के लिए तैयारियों में फौरी बाधाओं के कारण हुई. इसके साथ ही विश्व बैंक ने भरोसा जताया है कि वृद्धि में गिरावट वाले महीनों में सुधर जाएगी. 

विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम योंग किम ने यहां यह भी कहा कि माल व सेवा कर (जीएसटी) का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा सकारात्मक असर होने जा रहा है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की सालाना बैठक से पहले जिम योंग किम ने कहा,पहली तिमाही में गिरावट आई लेकिन हमारा मानना है कि यह मुख्य रूप से जीएसटी के लिए तैयारियों में अस्थायी बाधाओं के कारण हुआ. यह जीएसटी अर्थव्यवस्था पर बड़ा सकारात्मक असर डालने जा रहा है.’ वित्त मंत्री अरूण जेटली अगले सप्ताह होने वाली सालाना बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करेंगे.

पहली तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट दर्ज की गई. विपक्ष दलों व अनेक अर्थशास्त्रियों ने इसके लिए नोटबंदी तथा जीएसटी को जिम्मेदार बताया है. अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर सालाना आधार पर 5.7 प्रतिशत रही जो जनवरी-मार्च ​तिमाही में 6.1 प्रतिशत थी. सवाल के जवाब में विश्व बैंक के अध्यक्ष ने जोर दिया कि नरमी अस्थायी है. किम ने कहा,हमारा मानना है कि हालिया नरमी अस्थायी है ​जो आने वाले महीने में सुधर जाएगी और जीडीपी वृद्धि साल के दौरान स्थिर होगी. हमारी करीबी निगाह है.

क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारोबारी माहौल सुधारने के लिए वास्तव में काम किया है. हमारा मानना है कि इन सभी प्रयासों का अच्छा परिणाम आएगा. भारत व मानव पूंजी संबंधी एक सवाल पर किम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सफाई से जुड़े मुद्दों पर गहरी प्रतिबद्धता जताई है और स्वच्छ भारत भी सबसे प्रभावी कार्यक्रमों में से एक है. उन्होंने कहा,मैं जानता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी खुद समूचे भारत के लिए अवसर सुधारने को बहुत प्रतिबद्ध हैं. लेकिन भारत के समक्ष अनेक चुनौतियां हैं और बाकी देशों की तरह वहां भी सुधार की व्यापक गुंजाइश है.