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भला, दो करोड़ क्या होते हैं?
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी आप पार्टी, दोनों ही रोज़-रोज़ कीचड़ में धंसते चले जा रहे हैं। अब उनके एक मंत्री रहे साथी, कपिल मिश्रा ने ही उन पर दो करोड़ रु. की रिश्वत लेने का आरोप लगा दिया है। यह आरोप अपने आप में विचित्र है। एक अन्य मंत्री, सत्येंद्र जैन, अपने मुख्यमंत्री को रिश्वत क्यों देगा? जैन पर आरोप लगाया गया है कि उसने मुख्यमंत्री के रिश्तेदार का 50 करोड़ का मामला हल करवाया है। इस बात से अंदाज़ लगाया जा सकता है कि रिश्वत का जो पैसा अरविंद के रिश्तेदार ने जैन को दिया होगा, उसका एक हिस्सा जैन ने अरविंद को दे दिया।
आधार कार्ड पर साधार बहस
आधार कार्ड को लेकर आजकल देश में काफी बहस चल रही है। मामला सर्वोच्च न्यायालय में भी गया हुआ है। सरकार कहती है कि भारत के हर नागरिक को यह पहचान-पत्र अनिवार्य रुप से रखना होगा। जबकि सर्वोच्च न्यायालय अपने पिछले दो फैसलों में कह चुका है कि इसे आप अनिवार्य नहीं कर सकते। सरकार के अपने तर्क हैं। वह कहती है कि ‘आधार’ नामक पहचान-पत्र उंगलियों के छापे और आंखों के चित्र से बनते है। इसकी नकल दुनिया में कोई नहीं कर सकता। इसमें धारक का नाम, पता, व्यवसाय, बैंक, खाता नं. तथा अन्य कई जरुरी जानकारियां भी रहेंगी, जो सरकारी डाटा-बैंक में जमा रहेंगी। जब भी जरुरत होगी, सभी जानकारी एक सेंकड में हासिल हो जाएगी।
लोकपाल तुरंत नियुक्त हो
लोकपाल की नियुक्ति के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की राय पर सरकार को तुरंत अमल करना चाहिए। वर्तमान भाजपा सरकार कुर्सी में इसीलिए बैठ पाई है कि पिछली कांग्रेसी सरकार गले-गले तक भ्रष्टाचार में डूबी हुई थी। भ्रष्टाचार और उसकी ज़हरीली खबरों से लोग इतने खफा हो गए थे कि उन्होंने कुछ नौसिखिए लड़कों और एक खोखले प्रतीक की चुनौती को राष्ट्रीय जन-आंदोलन बना दिया था। उसी आंदोलन की लहर पर सवार होकर भाजपा सत्ता में आई लेकिन तीन वर्ष बीत गए, अभी तक लोकपाल नियुक्त नहीं किया जा सका।
हिंदी की आरती पर एतराज
तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेता एम.के. स्टालिन ने केंद्र सरकार की हिंदी नीति को आड़े हाथों लिया है। ज़रा गौर करें कि उनका अपना नाम विदेशी है। रुसी है। अपने इस रुसी नाम को भी वे ठीक से नहीं लिखते। इसे वे अंग्रेजी के नकलची उच्चारण से लिखते हैं। स्तालिन नहीं, स्टालिन! अब उन्होंने जो लंबा-चौड़ा बयान दिया है, वह तमिल भाषा के समर्थन में उतना नहीं है, जितना अंग्रेजी के समर्थन में हैं। यदि वे सचमुच तमिल का समर्थन करते होते तो राष्ट्रीय स्तर पर उनका साथ देने के लिए मैं पूरी तरह से तैयार रहता लेकिन वे हिंदी-विरोध को ही तमिल-समर्थन समझ रहे हैं।
इनसाइट फीचर- पत्थरफेंकुओं पर गज़ब की पहल
कश्मीर के पत्थरफेंकू लड़कों पर हमारी फौज ने जबरदस्त दांव मारा है। इस बार उन्होंने एक पत्थरफेंकू लड़के को पकड़ कर जीप पर बिठाया और बांध दिया। उसे जीप पर बैठा देख कर अन्य पत्थरफेंकू लड़के असमंजस में पड़ गए। अब वे पत्थर चलाते तो फौजियों पर वे पड़ते या नहीं पड़ते लेकिन उनके उस साथी को तो वे चकनाचूर कर ही देते। ऐसे में वह लड़का उन फौजी जवानों की ढाल बन गया। वह लड़का भी सही-सलामत बच निकला और ये फौजी भी अपने ठिकाने पर पहुंच गए।
डा. भीमराव अंबेडकर जन्मदिवस पर विशेष- समता का विकल्प नहीं, भीमराव अंबेडकर का अमर वाक्य यथार्थ में बदला
संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान निमात्री समिति में 1949 में अपने भाषण में बताया था कि भारतीय संविधान के निर्माण में भले दो वर्ष ग्यारह माह सत्रह दिन लगे। लेकिन संविधान सभा की 11 बैठकें हुई और इन सत्रों में 6 सत्रों में संविधान के उद्देश्य, मूलभूत अधिकार, संघ की शक्तियों, राज्यों के अधिकार पर विचार के अलावा अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति, जनजातियों के हित में बनी समितियों की अनुशंसाओं पर समग्रता से विचार हुआ।
गोबर के चमत्कारी प्रयोग
जबलपुर तो मैं आया था, महावीर जयंती के सिलसिले में लेकिन यहां दो अन्य महत्वपूर्ण काम भी हो गए। एक तो शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंदजी से भेंट और दूसरा दयोदय गौशाला का निरीक्षण। स्वरुपानंदजी ने कई बार वादा करवाया था कि जबलपुर के पास एक जंगल में उनका जो आश्रम है, उसमें मुझे अवश्य आना है लेकिन वे आजकल जबलपुर से 40-45 किमी दूर सांकलघाट नामक स्थान के उभय भारती महिला आश्रम में ठहरे हुए हैं, क्योंकि परसों यहां नर्मदा नदी के किनारे मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने ‘नमामि नर्मदे’ उत्सव रखा हुआ था।
तीन तलाक का मुद्दा लेकर आए लेखराज टंडन
लेखन और निर्देशन की दुनिया में लेखराज टंडन एक बड़ा नाम हैं। निर्देशन ही नहीं, उन्होंने कई फिल्मों में अभिनय भी किया है। करीब 90 वर्ष की उम्र में भी उनका जोश कायम है और वे अपने दर्शकों के लिए इस बार एक खास फिल्म लेकर आ रहे हैं जिसके लेखन के साथ-साथ निर्देशन भी उनका है। इस फिल्म का विषय ज्वलंत है, जो आज समुदाय में उथल-पुथल पैदा कर चुका है और वो है ट्रिपल तलाक का मुद्दा।
मोहन भागवत का राष्ट्रपति होना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक याने मुखिया श्री मोहन भागवत का नाम राष्ट्रपति पद के लिए उछला है। शिवसेना के एक प्रवक्ता ने उन्हें राष्ट्रपति बनाने का प्रस्ताव किया है। शिव सेना के इस प्रस्ताव की नरेंद्र मोदी उपेक्षा नहीं कर सकते, क्योंकि उप्र में प्रचंड विजय पाने के बावजूद भाजपा को राष्ट्रपति का चुनाव जीतने के लिए अभी कम से कम 20 हजार वोट कम पड़ रहे हैं। जबकि शिवसेना के 21 सांसद और 63 विधायकों के कुल मिलाकर 25,893 वोट बनते हैं। यदि शिव सेना बगावत पर उतर जाए तो भाजपा के उम्मीदवार का राष्ट्रपति बनना खटाई में पड़ सकता है।
मजबूत लोकतंत्र के लिए सांसदों की हाजिरी जरूरी- ललित गर्ग
संसद सत्र के दौरान सांसदों के अनुपस्थित रहने का मामला इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं। मंगलवार को कुछ ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हो गई, जब राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूछे जाने वाले पूरक प्रश्नों के जवाब देने के लिए संबंधित विभागों के कई मंत्री उपस्थिति नहीं थे। इस पर सभापति हामिद अंसारी ने नाराजगी जाहिर की, तो विपक्ष को चुटकी लेने का मौका मिल गया। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसदीय दल की बैठक में प्रतिनिधियों को आड़े हाथों लिया। सांसदों की अनुपस्थित रहने की प्रवृत्ति पुरानी भले ही है, लेकिन अक्षम्य है।
ऐसे ’अपनों’ से बचें राहुल गांधी
पिछले के कई बरसों से देश में कोई भी चुनाव हो, राहुल गांधी की जान पर बन आती है। पिछले लोकसभा चुनाव हों, उससे पहले के विधानसभा चुनाव हों या उसके बाद के विधानसभा चुनाव हों, सभी के चुनाव नतीजे राहुल गांधी केnसियासी करियर पर गहरा असर डालते हैं। पिछले काफ़ी अरसे से कांग्रेस को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है। और हर हार के साथ राहुल गांधी के हिस्से में एक हार और दर्ज हो जाती है। आख़िर क्या वजह है कि राहुल गांधी के आसपास शुभचिंतकों की बड़ी फ़ौज होने के बावजूद वह कामयाब नहीं हो पा रहे हैं।
हरियाणा और मणिपुर राह दिखा रहे
इस रविवार को उप्र में योगी आदित्यनाथ की शपथ हुई। इसके साथ-साथ हरियाणा और मणिपुर की सरकारों ने ऐसे दो अच्छे काम कर दिए, जिनकी तारीफ सभी करेंगे। हरियाणा में जाट आंदोलन और मणिपुर में नगा आंदोलन स्थगित हो गया। हरियाणा के जाट बहुत भड़के हुए हैं। वे अपने लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थाओं में भी आरक्षण मांग रहे हैं। उनका आंदोलन पहले भी हिंसक रुप धारण कर चुका हैं। कई लोग पहले मौत के घाट उतर चुके हैं।
इनसाइट फीचर- बुद्धिजीवी परेशान हिन्दू क्यों आये साथ
विधानसभा चुनाव परिणाम ने देश के कई बुद्धिजीवियों की नींद उड़ा दी है और उनकी संगत में रहते नेताओं को तो अपने अस्तित्व को ही बचायें रखने में मुश्किल हो रही है। परेशानी इस बात से है कि हिन्दू साथ क्यों आ गये। जब तक वे बटें हुये थें उनकी बाते सुनी जा रही थी सरकारें उन्हे मान्यता दे रही थी अब हिन्दू के एक होने से उनकी बातों की निरर्थकता दिखाई देने लगी है। तृष्टीकरण की राजनीति करने वालों के पिठू अपने लेखों और मंचों में व्यख्यानों को देकर यह सिद्ध करने में जुटे रहते है कि हिन्दू हमेशा मूर्ख बनाया जा सकता है अतः धर्म के नाम पर उसे बाटों और खुद उसके रहनुमा बन जाओ। पर इस बार जैसे ही वे कुछ उगलते एक नई बहस शुरु हो जाती। लगातार वे एक ही बात का ढींढोरा पिटते रहे और जनता उनकी बातों को मूखर्तापूर्ण मान आगे बढ़ चली उन्हे दिखा भी नही।
सेवा के नाम पर मेवा
देश में लगभग 33 हजार समाजसेवी संस्थाएं हैं, जो विदेशी पैसों पर पल रही हैं। इनमें से 20 हजार संस्थाओं का हुक्का-पानी सरकार ने बंद कर दिया है। उसने ऐसा क्यों किया है, यह उसे विस्तार से बताना चाहिए। जाहिर है कि इन संस्थाओं के हिसाब-किताब में गड़बड़ी पाई गई है लेकिन यह तो मामूली कारण है। यदि उनकी चंदाबंदी का कारण यही है तो वे अपने बही-दस्तरे जल्दी ही ठीक कर लेंगी। तो क्या सरकार उन्हें फिर से विदेशी चंदा लेने की इजाजत दे देगी?
आर्यसमाज जगे तो देश उठे
दो दिन मैंने हैदराबाद में बिताए। मैं सोचता रहा कि निजाम के विरुद्ध आर्यसमाज ने जबर्दस्त आंदोलन न छेड़ा होता तो क्या आज हैदराबाद भारत का हिस्सा होता? हैदराबाद तो क्या, भारत की आजादी और एकता में जो योगदान महर्षि दयानंद और आर्यसमाज का था, उसके आगे सिर्फ गांधी की कांग्रेस ही टिक सकती है। कांग्रेस की भी असली ताकत आर्यसमाज ही था। इसके पहले कि कांग्रेस और गांधी का उदय हुआ महर्षि दयानंद ने स्वतंत्रता का शंखनाद कर दिया था। उन्होंने आजादी की नींव पक्की कर दी थी।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष- नारी अस्तित्व एवं अस्मिता पर धुंधलके क्यों?
सम्पूर्ण विश्व में नारी के प्रति सम्मान एवं प्रशंसा प्रकट करते हुए 8 मार्च का दिन उनकी सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में, उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन से पहले और बाद में हफ्ते भर तक विचार विमर्श और गोष्ठियां होंगी जिनमें महिलाओं से जुड़े मामलों जैसे महिलाओं की स्थिति, कन्या भ्रूण हत्या की बढ़ती घटनाएं, लड़कियों की तुलना में लड़कों की बढ़ती संख्या, गांवों में महिला की अशिक्षा एवं शोषण, महिलाओं की सुरक्षा, महिलाओं के साथ होने वाली बलात्कार की घटनाएं, अश्लील हरकतें और विशेष रूप से उनके खिलाफ होने वाले अपराध को एक बार फिर चर्चा में लाकर वाहवाही लूट ली जायेगी।
कहां हैं वे टीन की तलवारें?
आसाम का यह यंत्रण शिविर अब भारत का जलता हुआ सच है और हिंदुत्व का एजेंडे का ट्रम्प कार्ड भी। इस संबंध में हिंदुत्व का ट्रम्प हिंदुत्व का परिभाषा कुल मिलकर उसी में है, जो भारत में हिन्दूत्व का संघ परिवार है। इस बात की जरुरत है कि रोटी बेटी के रिश्ते से इस्लामी वर्ग के मुसलमानों के हिंदुत्व है, जिसका ब्यौरे सार्वजनिक हैं और उन्हें दोहराने की ज़रूरत नहीं है।
भारत-चीन संवाद
विदेश सचिव सु. जयशंकर ने चीन के नेताओं और अफसरों से वहां जाकर जो संवाद कायम किया है, उससे बेहतर तरीका फिलहाल क्या हो सकता है? इस समय विवाद के तीन तात्कालिक मुद्दे हैं। पहला, जैश-ए-मुहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर संयुक्तराष्ट्र का प्रतिबंध और इस प्रतिबंध का चीन द्वारा विरोध, दूसरा, परमाणु आपूर्ति समूह में भारत की सदस्यता में चीन का अड़ंगा और तीसरा, पाकिस्तानी कब्जे के भारतीय कश्मीर में से होकर सड़क बनाने की चीनी योजना।
अदालतों-अस्पतालों पर लगे लगाम
सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश जे चेलमेश्वर ने एक नए कोर्ट-भवन का उद्घाटन करते हुए बड़े पते की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी भी देश में नए-नए अस्पतालों और अदालतों का खुलते जाना कोई आदर्श स्थिति नहीं है। आज तक किसी डाक्टर या जज ने ऐसी बात कभी कही है, क्या? इस उलटबासी को कहने का सही अर्थ आप नहीं लगा पाएंगे तो आप शायद सोचने लगेंगे कि यह कैसा जज है? यह अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार रहा है?
ईरान पर ट्रंप का बरस पड़ना
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही अमेरिका और ईरान में फिर से तनाव बढ़ गया है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर कुछ नए प्रतिबंध लगा दिए हैं, क्योंकि ईरान ने एक प्रक्षेपास्त्र-परीक्षण कर लिया है। ईरान का कहना है कि इस परीक्षण से उसने किसी भी संधि का उल्लंघन नहीं किया है। उसके अनुसार 2015 में परमाणु-परीक्षणों के बारे में उसने अमेरिका और यूरोपीय राष्ट्रों से जो समझौता किया था, उसमें परमाणु बम नहीं बनाने और परमाणु-प्रक्षेपास्त्र नहीं छोड़ने का संकल्प किया था। उसने अभी जो छोड़ा है, वह परमाणु-प्रक्षेपास्त्र नहीं है। वह सिर्फ प्रक्षेपास्त्र है।
पद्म-सम्मान का महत्व क्या?
भारत सरकार के पद्म पुरस्कारों पर हमेशा की तरह इस बार भी विवाद छिड़ गया है। पुरस्कारों के लिए लाइन में लगे रहे ज्यादातर लोगों ने चुप्पी धारण कर ली है, क्योंकि मुंह खोलकर वे अपनी बेइज्जती क्यों करवाएं। उन्हें इस बार नहीं मिला तो नहीं मिला। अगली बार वे फिर टिप्पस भिड़ाएंगे। लेकिन दो-तीन भारतीय खिलाड़ियों ने अपना मुंह खोल दिया है। उन्होंने अखबारों को कहा है कि कोई उन्हें बताए कि अब वे क्या करें, जिससे उन्हें ये पद्म-पुरस्कार मिल सके?
शराबबंदीः सबसे लंबी कतार
शनिवार को पटना के गांधी मैदान से एक मानव-श्रृंखला का निर्माण हुआ, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी मानव-श्रृंखला माना गया है। इसमें तीन करोड़ से ज्यादा लोगों ने भाग लिया। यह कतार 11 हजार 400 किमी लंबी थी और 38 जिलों में से होकर गई थी। इस मानव-श्रृंखला की लंबाई नापने के लिए 'इसरो' के उपग्रह और 38 ड्रोन और हेलिकाप्टर लगाए गए थे। यह दिन में लगभग पौन घंटे तक चली। यह श्रृंखला शायद बिहार के एक कोने से दूसरे कोने तक बनाई गई होगी। जहां तक ​​मुझे याद पड़ता है, इतनी लंबी मानव-कतार मैंने तो कभी नहीं देखी।
दिग्गज अभिनेता ओम पुरी का निधन- जाने उनके जीवन से जुड़ी कुछ बांते
हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ओम पुरी का आज सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके ड्राइवर के मुताबिक एक फिल्म की शुटिंग से लौटने के बाद उन्हे अचानक दिल का दौरा पड़ा और सुबह 9: 15 पर उनका मौत हो गई। ओम पुरी की गिनती बॉलीवुड के प्रमुख कलाकारो मे की जाती है। इस खबर के बाद पूरे बॉलीवुड मे शोक की लहर फैल गई। अपने बेबाक और खुले विचारों के साथ साथ अभिनय की दुनिया मे ओम पुरी की एक अलग पहचान है।
साल 2016 भारत के लिए उपलब्धियों के साथ-साथ चुनौतियों का भी रहा साल
साल 2016 भारत के लिए कई तरह के उतार-चढ़ाव देखे... इस साल भारत ने वित्तिय समस्याओं के साथ- साथ कई उपलब्धियां भी रही। खेल हो या देश की सुरक्षा की बात भारत हर जगह अपना दबदबा बनाने मे कामबाय रहा है। हर क्षेत्र मे भारत ने कुछ न कुछ ऐसा किया है जो पहले कभी नही हुआ है।
जन्मदिन पर विशेष- सदी के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना
‘मेरे सपनों की रानी’ और ‘रूप तेरा मस्ताना’ जैसे रोमांटिक गीतों के भावों को अपनी जज्बाती अदाकारी से जीवंत करने वाले राजेश खन्ना ने अपने जमाने में लगातार 15 हिट फिल्में देकर बालीवुड को ‘सुपर स्टार’ की परिभाषा दी थी। राजेश खन्ना के बालों का स्टाइल हो, या ड्रैसअप होने का तरीका, उनकी संवाद अदायगी हो या पलकों को हल्के से झुकाकर, गर्दन टेढी कर निगाहों के तीर छोड़ने की अदा।। उनकी हर अदा कातिलाना थी। उनकी फिल्मों के एक एक रोमांटिक डायलॉग पर सिनेमाघरों के नीम अंधेरे में सीटियां ही सीटियां गूंजती थी।
मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा का निधन, जाने कैसा रहा उनका राजनैतिक जीवन
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। सुंदरलाल पटवा दो बार मध्यप्रदेश के सीएम रह चुके थे। बुधवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हुई। सुंदरलाल पटवा काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। पटवा ने निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। पटवा के निधन की खबर लगते ही सीएम शिवराज सिंह चौहान अस्पताल पहुंचे, सीएम के साथ उनकी पत्नी साधना सिंह भी साथ पहुंची। उनके निधन की खबर से मप्र-छग में शोक की लहर दौड़ गई है।
जयललिता- अभिनेत्री से अम्मा बनने तक का सफर
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम पार्टी की प्रमुख जे जयललिता का चेन्नई में सोमवार रात निधन हो गया। अपोलो अस्पताल ने प्रेस नोट जारी कर जयललिता के निधन की सूचना दी। 68 साल की जयललिता 22 सितंबर से अपोलो अस्पताल मे भर्ती थी। तभी से उनके समर्थको का जमावड़ा अस्पताल के बाहर लगा हुआ था। 2 दिन पहले उन्हे दिल का दौरा पड़ने के कारण आईसीयू मे भर्ती कराया गया था।
विमुद्रीकरण: कतारें छोटी हो रही हैं पुराने नोटों से किसानों को बीज खरीदने की अनुमति
काले धन और भ्रष्‍टाचार पर नकेल कसने के लिए उच्‍च मूल्‍य के करेंसी नोटों के विमुद्रीकरण का प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी का साहसिक कदम उनके इस संकल्‍प का संकेत देता है कि राजनीति की अनदेखी करते हुए बड़े और शक्तिशाली शक्तियों से निपटा जा सकता है। जब प्रधानमंत्री ने 8 नवंबर की शाम को 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों के विमुद्रीकरण की अचानक घोषणा की तो उनके कट्टर समर्थकों सहित लोग स्‍तब्‍ध रह गए। काफी भय और गलतफहमियां थीं।
पीएफ विड्राल के लिए अब जरूरी नहीं है एंप्लॉयर की मंजूरी
आम नौकरीपेशा इंसान अपनी नौकरी के दौरान जो पैसा पीएफ के तौर पर इकट्ठा करता है कई बार उसे ही लेने के लिए उसे कई धक्के खाने पड़ते हैं. कई बार कर्मचारियों को अपने प्राविडेंट फंड (पीएफ) का पैसा निकालने के लिए लंबी कार्रवाई करनी पड़ती है. दफ्तरों का चक्कर लगाना,मेल करना,फोन करना,एचआर से संपर्क करना जैसे कई बड़े काम करने पड़ते हैं और अपने ही हक का पैसा लेने के लिए सौ तरह के पापड़ बेलने पड़ते हैं.