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दाग अच्छे हैं >>> दिग्विजय सिंह द्वारा नर्मदा परिक्रमा पर विशेष






ज्ञानदेव मिश्रा
लेखक पत्रकार हैं
भोपाल,09/अक्टूबर/2017(ITNN)>>> सर्फ एक्सेल के विज्ञापन में यह बात बड़े करीने से प्रचारित की जाती है कि,अगर दाग धुल जाएं तो अच्छे हैं और सर्फ एक्सेल से दाग धुल जाते है सो ग्राहक सर्फ एक्सेल इस्तेमाल करें और बच्चों को उन्मुक्त खेलने दे। राजनीति भी यही कहती है नीचे दिए हुए दोनों चित्र उत्प्रेरक और उन्मादक हैं जो बहुत कुछ कह रहे हैं। धर्म ध्वजा थामे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह नर्मदा परिक्रमा पर हैं कहा जाता है की गंगा स्नान से एवं नर्मदा के मात्र दर्शन से ही सारे कर्म क्षम्य हो जाते हैं अर्थात व्यक्ति पुनीत और पवित्र हो जाता है। 

ऐसी पुराणों में धारणा है दिग्विजय सिंह जी कह रहे हैं कि यह यात्रा राजनैतिक नहीं है पूरी तरह धार्मिक है इसका सच स्वयं दिग्विजय सिंह एवं सरोकार रखने वाले सभी लोग भली भांति जानते हैं। इसके पूर्व वह मथुरा वृंदावन भी जा चुके हैं दिग्विजय सिंह एक आस्तिक व्यक्ति हैं उनके करीबी बताते हैं कि सुबह योग प्राणायाम पूजा से उनकी दिनचर्या शुरू होती है लेकिन चुनावी वर्ष में जब बिगुल बज चुका है रणभेरी की आवाज नजदीक आती जा रही है ऐसे समय में परिक्रमा सार्थक ही होगी। 

इसके साथ अपनी इस छवि की लॉन्ड्रिंग करना भी जरूरी है जो उत्तर प्रदेश में महासचिव रहने के दरमियां अल्पसंख्यक वोटों को रिझाने के लिए दिए गए वक्तव्य से बनी। कुछ नए शब्दों की उत्पत्ति भगवा आतंकवाद ,हिंदू आतंकवाद ,बटाला एनकाउंटर फर्जी, ओसामा जी कहने के कारण एक बड़ा बहुसंख्यक वर्ग नाराज है इसलिए धर्म ध्वजा धारण कर सवा सौ सीटों पर सीधा संपर्क करने से कई समीकरण सधते नजर आ रहे हैं, एक तो छवि साफ़ होना , दूसरे सीधे जनता के संपर्क में आने से वाटर टेस्टिंग एवं पल्स लेने का कार्य भी हो रहा है। 

अगले 3 महीनों में यह तय हो जाएगा की जनता का मूड क्या है उससे अगले चुनाव में लीड किसे करना है यह भी तय हो ही जाएगा अभी तो इतना कहकर इस पर स्टाप लगाया गया है कि आलाकमान ही तय करेगा कि प्रदेश का नेतृत्व कौन करेगा। इसमें देखने लायक बात यह है कि 10 वर्ष तक सत्ता में कोई पद ना लेने की कसम पूरी हो चुकी है जिन कारणों से सत्ता से दूरी बनी थी उनमें से प्रमुख कारण अब संतुलित हैं।मुख्य रुप से कर्मचारियों की नाराजगी सड़क,बिजली पानी एवं चुनाव के चलते व्यक्तव्य जिन से जनता नाराज हुई थी वह है अब शिथिल पड़ चुके हैं।

बार-बार एक बात सुनने में आती है कि जनता दिग्विजय सिंह से नाराज है लेकिन यह बात कोई नहीं समझा पाया कि वह अपनी सीट कैसे जीत जाते हैं,अगर इतनी ही नाराजगी है तो उनको हार जाना चाहिए। इस देश ने बहुत बड़े बड़े राजनेताओं को हारते देखा है,तीन बार की सीएम शीला दीक्षित जी हार गई,श्रीमती इंदिरा गांधी,श्री अटल बिहारी वाजपेई,श्री अर्जुन सिंह,हेमंती नंदन बहुगुणा जनता के द्वारा इन्हें भी हराया गया तो इतनी नाराजगी के बाद वह अपनी और अपने खास समर्थकों की सीट पिछले एक दशक से कैसे बचा लेते हैं तो यह कहना सर्वथा गलत है कि यदि मध्य प्रदेश की कमान दिग्विजय सिंह को मिलती है तो सत्ता पक्ष के लिए राह आसान होगी।

अब मैं दूसरे चित्र पर आता हूं दूसरा चित्र सपाक्स के सम्मेलन का है जो दिनांक ८ अक्टूबर २०१७ का है सपाक्स सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों का संगठन है। यह संगठन प्रमोशन में आरक्षण के विरुद्ध है इस संगठन का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट यह तय कर चुका है कि पदोन्नति में आरक्षण अनुचित है तो राज्य सरकार बिलावजह जून 16 को हाईकोर्ट से हारने के बाद माननीय सुप्रीम कोर्ट में अपील कर कर्मचारियों का नुकसान कर रही है।

उस पर तुर्रा यह कि पहले जो गलती दिग्विजय सिंह जी ने की थी 2003 में कि कर्मचारी वोटों से कोई फर्क नहीं पड़ता उससे आगे बढ़कर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री दो बार यह कह चुके हैं कि "कोई माई का लाल प्रमोशन में आरक्षण समाप्त नहीं कर सकता" और बहुत बड़ी राशि सुप्रीम कोर्ट के वकीलों पर खर्च कर दी।

दूसरा चित्र जिसमें कुछ कर्मचारी - "मैं हूँ माई का लाल",,,,, की टोपी लगाए सम्मेलन में आए आज सम्मेलन में मध्य प्रदेश कैडर के एक आईएएस राजीव शर्मा शामिल हो चुके हैं ।

मेरी निजी जानकारी में अगले कुछ दिनों में IAS,IPS एवं आइएफएस के अधिकारियों का इस संगठन से जुड़ाव तय है इसमें यह बात महत्वपूर्ण है इसी संगठन ने एक नया संगठन सामान्य पिछड़ा अल्पसंख्यक कल्याण संगठन खड़ा किया है जिस की घोषणा रविवार हुई । तो जो गलती 2003 में कांग्रेस से हुई थी वही गलती आज सत्ता पक्ष दोहरा रहा है। 10 वर्ष सत्ता में रह चुक पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह IAS लॉबी एवं पत्रकारों के सतत संपर्क में रहते हैं उनके लिए समीकरण बनाना दाएं हाथ का खेल है एक और बात पौराणिक इतिहास में जब कोई राजा या जागीरदार सत्ता छोड़कर पैदल निकल जाता है तो वह जनता में सीधा प्रभाव छोड़ता है, इसका इतिहास गवाह है। 

पिछला चुनाव भारतीय जनता पार्टी लगभग कुल पड़े मतों का 49.8 फ़ीसदी मत लेकर जीती है भारतीय जनता पार्टी का हर दूसरा विधायक कुल पड़े मतों का 50%से ऊपर मत लेकर विजय हुआ है,यह तथ्य भारतीय जनता पार्टी को अति विश्वास में डाले हुए हैं,जीएसटी के कारण किसान वर्ग की नाराजगी, दवाओं की बड़ी हुई कीमत बेरोजगारी ,नए उद्यम का जमीन पर न आना युवाओं को आक्रोशित कर रहा है, वह युवा जो आंख मूंदकर भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में मत दे रहा था पिछले कुछ महीनों से उसने अपनी राय पूरे देश में बदली है। 

JNU एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनाव नतीजे इस ओर इशारा करते हैं। 10 वर्ष सत्ता में रह चुक पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह IAS लॉबी एवं पत्रकारों के सतत संपर्क में रहते हैं उनके लिए समीकरण बनाना दाएं हाथ का खेल है एक और बात पौराणिक इतिहास में जब कोई राजा या जागीरदार सत्ता छोड़कर पैदल निकल जाता है तो वह जनता में सीधा प्रभाव छोड़ता है,इसका इतिहास गवाह है। पिछला चुनाव भारतीय जनता पार्टी लगभग कुल पड़े मतों का 49.8 फ़ीसदी मत लेकर जीती है। 

भारतीय जनता पार्टी का हर दूसरा विधायक कुल पड़े मतों का 50%से ऊपर मत लेकर विजय हुआ है,यह तथ्य भारतीय जनता पार्टी को अति विश्वास में डाले हुए हैं,जीएसटी के कारण किसान वर्ग की नाराजगी,दवाओं की बड़ी हुई कीमत बेरोजगारी,नए उद्यम का जमीन पर न आना युवाओं को आक्रोशित कर रहा है, वह युवा जो आंख मूंदकर भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में मत दे रहा था पिछले कुछ महीनों से उसने अपनी राय पूरे देश में बदली है। JNU एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनाव नतीजे इस ओर इशारा करते हैं।