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दाग अच्छे हैं >>> दिग्विजय सिंह द्वारा नर्मदा परिक्रमा पर विशेष
सर्फ एक्सेल के विज्ञापन में यह बात बड़े करीने से प्रचारित की जाती है कि,अगर दाग धुल जाएं तो अच्छे हैं और सर्फ एक्सेल से दाग धुल जाते है सो ग्राहक सर्फ एक्सेल इस्तेमाल करें और बच्चों को उन्मुक्त खेलने दे। राजनीति भी यही कहती है नीचे दिए हुए दोनों चित्र उत्प्रेरक और उन्मादक हैं जो बहुत कुछ कह रहे हैं।
मोदी के विकास मिशन पर किसान आंदोलन का ग्रहण
मध्य प्रदेश में 5 माह की नर्मदा सेवा यात्रा की सफलता उसमें शामिल दिग्गजों की भरमार ने मध्यप्रदेश में राम राज्य की कल्पना को लगभग मूर्त रूप दे दिया था किंतु फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि नर्मदा जन आंदोलन को साकार करने वाला वही किसान तूफान बनकर रोड पर आ बैठा। जान देता किसान जान लेने पर उतारु हो गया।
बौद्धिक तेज से दमकता था उनका व्यक्तित्व
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री अनिल माधव दवे,देश के उन चुनिंदा राजनेताओं में थे, जिनमें एक बौद्धिक गुरूत्वाकर्षण मौजूद था। उन्हें देखने, सुनने और सुनते रहने का मन होता था। पानी, पर्यावरण,नदी और राष्ट्र के भविष्य से जुड़े सवालों पर उनमें गहरी अंर्तदृष्टि मौजूद थी। उनके साथ नदी महोत्सवों ,विश्व हिंदी सम्मेलन-भोपाल,अंतरराष्ट्रीय विचार महाकुंभ-उज्जैन सहित कई आयोजनों में काम करने का मौका मिला। उनकी विलक्षणता के आसपास होना कठिन था।
धर्मग्रंथ बड़ा है कि राष्ट्रग्रंथ ?
तीन तलाक के बारे में हमारे सर्वोच्च न्यायालय ने अभी जो शुरुआती विचार रखा है, उसी पर देश के विचारकों को खुली बहस चलाने की जरुरत है। अदालत ने कहा है कि वह सिर्फ तीन तलाक के मुद्दे पर विचार करेगी और यह देखेगी कि कुरान में उसका समर्थन है क्या? यदि कुरान तीन तलाक को ठीक मानती है और यदि मुसलमानों का यह धार्मिक मौलिक अधिकार है तो उसमें वह हस्तक्षेप नहीं करेगी।
एक जज का मुअत्तिल होना!
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ शाखा ने कमाल कर दिया। उसने एक जज को मुअत्तिल कर दिया। सरकारी नौकरों की मुअत्तिली की बात तो हम अक्सर सुनते ही रहते हैं लेकिन कोई जज मुअत्तिल कर दिया जाए, ऐसी बात पहली बार सुनने में आई है। इस जज को न तो शराब पीकर अदालत में बैठने के लिए मुअत्तिल किया गया है, न रिश्वत लेने के लिए और न ही कोई उटपटांग व्यवहार करने के लिए!
अतिथी लेख- हाजी अली दरगाह दिखाए रास्ता
मुंबई की प्रसिद्ध हाजी अली दरगाह के रखवालों ने आगे होकर अपने अवैध कब्जे को हटाने का वादा किया। मुझे यह खबर चुनाव-परिणामों की खबर से ज्यादा बड़ी इसलिए लगी कि भारत में मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों, गिरजों वगैरह को हम हमेशा कानून से ऊपर समझते हैं। जिसकी जहां मर्जी होती है, वहां वह अपना पूजा-स्थल खड़ा कर लेता है।
निक्की हेली पर फिजूल की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में मंत्री और सुरक्षा परिषद की वर्तमान अध्यक्ष निक्की हेली के बयान पर फिजूल ही हंगामा हो रहा है। निक्की ने पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कह दिया कि भारत और पाकिस्तान के संबंधों में कोई बड़ी गड़बड़ हो जाए, उसके पहले ही अमेरिका को दोनों के बीच कुछ भूमिका अदा करनी होगी। शायद खुद ट्रंप ही कुछ कोशिश करें। निक्की के इस बयान पर हमारे विदेश मंत्रालय की काफी सख्त और दो-टूक प्रतिक्रिया आई है।
यह कैसा ‘बड़ों का सदन’?
संविधान के मुताबिक वित्त विधेयक को पास करने का अधिकार सिर्फ लोकसभा को है। राज्यसभा उस पर बहस तो कर सकती है लेकिन उसे गिरा नहीं सकती। इस बार लाए गए इस वित्त विधेयक में सरकार ने 40 संशोधन पेश किए हैं। राज्यसभा के विरोधी सदस्यों का कहना है कि इन संशोधनों का का वित्त विधेयक से क्या लेना-देना है? इनमें से कई संशोधन ऐसे हैं, जिन पर राज्यसभा में मतदान होना चाहिए। राज्यसभा ने उन पर मतदान करके उन्हें गिरा भी दिया है। ऐसे पांच संशोधन हैं, जिन्हें उसने रद्द कर दिया है।
नया पिछड़ा आयोग अगड़ा बने
पिछड़ा वर्ग आयोग की जगह अब सरकार एक सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग राष्ट्रीय आयोग स्थापित करेगी। इस खबर को लेकर राज्यसभा में काफी हंगामा हो गया। राज्यसभा के कुछ सदस्यों ने यह आरोप लगाया कि यह आयोग इसलिए बनाया जा रहा है कि पिछड़ों और अनुसूचितों को मिलने वाले आरक्षण में कटौती की जा सके। इस घोषणा को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत के उस बयान से भी जोड़ा जा रहा है, जो उन्होंने बिहार के चुनाव के दौरान दे दिया था। उन्होंने कहा था कि आरक्षण की समस्या पर पुनर्विचार होना चाहिए।
देश-प्रेम की अद्भुत मिसाल
भोपाल-उज्जैन रेलगाड़ी में विस्फोट करवाने वाला सैफुल्लाह तो मारा गया लेकिन उसके पिता सरताज ने अपने बेटे का शव लेने से मना कर दिया है और उन्होंने ऐसी बात कह दी है, जो कोई बाप अपने बेटे के लिए नहीं कहता। सरताज ने कहा है कि ‘जो अपने देश का नहीं हुआ, वह हमारा क्या होगा?’ उन्होंने यह भी कहा कि मेरा बेटा देशद्रोही निकला। देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले से हमारा कोई रिश्ता-नाता नहीं है। उसे तो अल्लाह भी माफ नहीं करेगा।
मोदी क्यों करें ट्रंप से तुलना?
लोकसभा-सदस्यों के एक रात्रि-भोज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति सहानुभूति दिखाई और कहा कि पता नहीं क्यों, उन पर लोग पत्थर बरसा रहे हैं? जैसे मैं दिल्लीवाला नहीं हूं, वैसे ही ट्रंप वाशिंगटन डीसी वाले नहीं हैं। जैसे वे बाहरी हैं, मैं भी बाहरी हूं। यह कैसा संयोग है? संयोग यह भी है कि ट्रंप ने अपने चुनाव-अभियान के दौरान भारतीय मूल के वोट पटाते वक्त मोदी की तारीफों के पुल बांध दिए थे। वह ट्रंप की मजबूरी थी। यह मोदी कि मजबूरी हो सकती है कि वे जान-बूझकर ट्रंप के तारीफ में कसीदें काढ़ रहे हैं।
कांग्रेसः डूबता हुआ जहाज?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जालंधर में कहा है कि कांग्रेस तो अब एक डूबता हुआ जहाज है और इसी के साथ एक प्रसिद्ध हिंदी अखबार ने 'परिवार' के बारे में जो खबर छापी है, यदि वह सत्य है तो इस जहाज को डूबने से कोई नहीं बचा सकता। अखिलेश भी नहीं। अखिलेश की सायकिल पर कांग्रेस सवार जरुर हो गई है लेकिन उत्तरप्रदेश के सबसे लोकप्रिय अखबार में छपी यह खबर कांग्रेस को ले बैठेगी।
मैं खाता हूं और खाने देता हूं
अन्ना हजारे ने आम आदमी पार्टी को आड़े हाथों लिया है। इस पार्टी का जन्म अन्ना-आंदोलन के गर्भ से ही हुआ है लेकिन अन्ना को निराशा यह है कि यह पार्टी भी अन्य पार्टियों की तरह गोरखधंधे में फंस गई है। अन्ना पूछते हैं कि ‘आप’ की वेबसाइट से चंदादाताओं के नाम क्यों हटा लिये गए हैं? भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन से जन्मी यह पार्टी क्या अब खुद भ्रष्टाचार में नहीं फंस गई है? अपने चंदादाताओं की जानकारी छिपाने का क्या मतलब निकाला जाए? एक तरफ ‘आप’ भाजपा से मांग करती है।
एक ख़याल कर गया कमाल : शिवराज सिंह चौहान
कभी-कभी हमारे दिमाग में कोई अनूठा ख़याल आता है,जिसे ठीक से अमल में लाया जायें तो कमाल हो जाता है। खण्डवा जिले में हनुवंतिया जल क्रीड़ा परिसर की स्थापना ऐसा ही एक ख़याल था। पिछले साल सिंगापुर यात्रा के दौरान मैंने वहाँ सेन्टोसा आइलैण्ड देखा। मेरे मन में ख़याल आया कि अपने मध्यपेदश में भी कोई ऐसी जगह आकार ले। इसे ठोस रूप देने के लिये मेरे दिमाग में तत्काल खंडवा जिले का हनुवंतिया कौंध गया। इंदिरा सागर डेम के बैकवाटर से उभरा यह आइलैण्ड सचमुच बहुत अदभुत है।
मध्यप्रदेश – कामकाजी महिलाओं के लिए खुशनुमा माहौल
सीएसआईएस और नाथन की सर्वे रिपोर्ट में मध्यप्रदेश कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित सशक्तिकरण से ज्यादा महिलाओं की सुरक्षा का सवाल अनादि काल से चला आ रहा है । सुरक्षा के कारण सदियों से उन्हें पर्दे में रखने की प्रथा रही है। आधुनिकता के बावजूद आज भी दुनिया के कई कोनों में महिलाओं को बुरी नजर से बचाने के लिए पर्दे में रखा जाता है। महिलाओं के लिए समाज की आम हिदायत होती है कि वे घर की दहलीज पार ना करें । माता सीता का उदारहण भी दिया जाता है । जिन्होंने लक्ष्मण रेखा पार की और उसके बाद उन पर रावण का अत्याचार शुरू हुआ।