प्रदेश विशेष
अयोध्या मसले के हल पर अखाड़ा परिषद व शिया बोर्ड में सहमति
इलाहाबाद,14/नवम्बर/2017(ITNN)>>> अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद व शिया वक्फ बोर्ड के बीच सोमवार को राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले का हल निकालने पर सहमति हो गई है। दोनों संगठनों के नेताओं ने बताया कि बहुत जल्द समझौते को दस्तखत कर सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाएगा। उप्र शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी समझौते पर चर्चा के लिए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से मिलने उनके अयोध्या स्थित मठ बाघंबरी गद्दी पहुंचे।

रिजवी ने कहा कि देश में कहीं भी बाबर व मीरबाकी के नाम से मस्जिद नहीं बनाने पर भी सहमति हुई। नई जगह बनेगी "मस्जिदें अमन" सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त की सुनवाई में कहा था कि वह अयोध्या विवाद की अंतिम सुनवाई 5 दिसंबर से शुरू करेगी। रिजवी ने बताया कि शिया वक्फ बोर्ड समझौता शर्तों का प्रारूप तैयार कर रहा है। मस्जिद अयोध्या व फैजाबाद के बाहर मुस्लिम आबादी में बनाने का निर्णय हुआ,जिसका नाम होगा "मस्जिद-ए-अमन", जबकि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण कराने का प्रस्ताव पांच दिसंबर से पहले पहले सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिया जाएगा।

श्रीराम मंदिर निर्माण पर सुलह को लेकर महंत नरेंद्र गिरि रविवार को अयोध्या में थे। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास सहित अनेक संत-महात्माओं व मुस्लिम धर्मगुरुओं से मुलाकात की थी। इसमें अयोध्या में मंदिर निर्माण को लेकर सहमति बनाने का प्रयास किया गया। इसके तहत वसीम रिजवी इलाहाबाद आए।

सुन्नी वक्फ बोर्ड का गठन अवैध
महंत नरेंद्र गिरि से वार्ता करने के बाद उन्होंने कहा कि अयोध्या में ही श्रीराम मंदिर बनना चाहिए, क्योंकि यही उचित है। इसमें शिया वक्फ बोर्ड पूरा सहयोग करेगा। मंदिर निर्माण का सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा विरोध करने को उन्होंने औचित्यहीन बताया। कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड के पंजीयन को कोर्ट ने अवैध घोषित किया है, जिससे मस्जिद को लेकर उनका अधिकार खत्म हो गया है। कोर्ट के आदेश के चलते मस्जिद के स्थान को लेकर वर्ष 1944 से पहले की स्थिति कायम हो गई। 1944 से पहले शिया वक्फ बोर्ड की मस्जिद थी, जिसे हम हिंदुओं को मंदिर बनाने के लिए सौंप रहे हैं।

कुछ लोग चला रहे दुकानें
रिजवी ने कहा कि अयोध्या मामले को लेकर कुछ लोगों की दुकानें चल रही हैं। यही कारण है कि उन्होंने कभी सुलह-समझौते का प्रयास नहीं किया। अगर सुलह की पहल पहले होती तो आज देश का माहौल और अच्छा होता। वहीं अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने वसीम रिजवी की बात का समर्थन करते हुए कहा कि हिंदुओं को मस्जिद से कोई आपत्ति नहीं है। वह मस्जिद अयोध्या व फैजाबाद के बाहर बने, उसका नाम बाबर व मीरबाकी के नाम पर न हो, क्योंकि इससे नया विवाद खड़ा हो सकता है।

2010 में आया था हाई कोर्ट का फैसला
-2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन का तीन हिस्सों में विभाजन का फैसला किया था।

-हाई कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ के दो सदस्यों ने बहुमत से दिए फैसले में कहा था कि विवादित जमीन तीन बराबर हिस्सों में सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़े व राम लला के बीच बांट दी जाए।

-इसी साल 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील पर कोर्ट के बाहर समझौते का सुझाव दिया था। कोर्ट ने कहा था "धर्म व आस्था" के मसलों का चर्चा से ही श्रेष्ठ हल निकाला जा सकता है।

राम मंदिर मामले में अपनी इच्छा से बना मध्यस्थः श्रीश्री रविशंकर
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने कहा है कि राम मंदिर मामले में अपनी इच्छा से मध्यस्थ बने हैं। वह अयोध्या का दौरा करके 16 नवंबर को मामले के सभी पक्षों से मुलाकात करेंगे। श्री श्री रविशंकर ने सोमवार को यहां पत्रकारों से चर्चा में कहा कि वह जल्द ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार के नाते मुलाकात करेंगे। उनका कहना था कि मध्यस्थ बनने के पीछे उनका कोई निजी एजेंडा नहीं है। वह सभी पक्षों को सुनने के बाद अपनी राय व्यक्त करेंगे। कांग्रेस के प्रवक्ता टॉम वडक्कम ने सवाल उठाया था कि रविशंकर जैसे लोगों को किसने मध्यस्थता की जिम्मेदारी दी है। रविशंकर सरकार के एजेंट हैं।