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उदारवादी लोगों के हत्या से देश की छवि हो रही खराब : बॉम्बे हाईकोर्ट
मुंबई,12/अक्टूबर/2017(ITNN)>>> बांबे हाई कोर्ट ने दाबोलकर व पंसारे के परिजनों के अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि विपक्ष व उदारवादी लोगों की एक के बाद एक करके हत्या होने से देश की छवि पर दाग लग रहा है। अदालत ने गौरी लंकेश के मामले का जिक्र भी किया। जस्टिस एससी धर्माधिकारी व डी भारती की पीठ गुरुवार को उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मांग की गई थी कि दोनों मामलों की जांच की निगरानी अदालत खुद करे। 

पीठ ने कहा कि उदारवादी विचारधारा से जुड़े न केवल विचारकों बल्कि संस्थाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। पीठ ने कहा कि ये उसी तरह से है कि जैसे कोई मेरे विरोध में है तो मुझे उसे नेस्तनाबूद कर देना चाहिए। गोविंद पंसारे,नरेंद्र दाबोलकर की हत्या के मामले में जांच एजेंसियों ने रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी है। उल्लेखनीय है कि दाबोलकर की हत्या 20 अगस्त 2013 को पुणे में हुई थी। उसकी जांच सीबीआई कर रही है। 

जबकि पंसारे को 16 फरवरी 2015 को निशाना बनाया गया। उनका केस महाराष्ट्र सीआईडी के पास है। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर अदालत ने संतोष जताते हुए कहा कि विवेचना के दौरान हर पहलू को खंगाला गया है,लेकिन सीबीआइ व पुलिस को अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लेकर आरोपियों को गिरफ्तार करना चाहिए। दाबोलकर की हत्या के मामले में सारंग अकोलकर व विजय पंवार को नामजद किया गया है।

लेकिन अभी तक उनका पता नहीं चल सका है। अदालत ने माना कि एजेंसियों ने मेहनत तो की पर आरोपियों के काबू न होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पीठ ने टिप्पणी की कि केस के अंतराल में ही किसी दूसरे उदारवादी को निशाना बना लिया जाता है। एजेंसियों को अपनी जांच के तरीकों में बदलाव करके आरोपियों तक पहुंच बनानी होगी,नहीं तो इस तरह के तत्वों का हौसला बढ़ता रहेगा और उदारवादी लगातार उनका निशाना बनते रहेंगे।