प्रदेश विशेष
आतंकियों को हथियार सप्लाय करने के आरोप में दो पुलिसकर्मी गिरफ्तार
श्रीनगर,11/अक्टूबर/2017(ITNN)>>> कश्मीर घाटी में सक्रिय आंतकी अब बेगुनाहों का खून बहाने के लिए पाकिस्तान से आने वाली हथियारों की खेप के बजाए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह खुलासा दक्षिण कश्मीर में आतंकियों के लिए हथियार सप्लाई करने में लिप्त दो पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी से हुआ है। फिलहाल,पुलिस ने इस मामले में आतंकियों के एक मददगार और दो पुलिसकर्मियों को गिरफतार कर लिया है। उनके साथ इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों को गिरफ्तारी के लिए उनके ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।

आतंकियों की मदद के आरोप में दो पुलिसकर्मी गिरफ्तार
पकड़े गए पुलिसकर्मियों की पहचान कांस्टेबल शब्बीर अहमद मलिक और कांस्टेबल नजीर अहमद नजार के रुप में हुई है। शब्बीर जिला शोपियां के आमशीपोरा का रहने वाला है और इन दिनों जिला गांदरबल में पुलिस लाईन में तैनात है,जबकि नजीर अहमद जिला कुलगाम का रहने वाला है।नजीर अहमद इन दिनों जिला शोपियां में पुलिस लाईन की कोत में तैनात है। 

एसएसपी शोपियां एसआर अंबरकर ने बताया कि गत सोमवार की शाम को शोपियां सर्किट हाऊस के बाहर नाके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने एक युवक आदिल अहमद नेगरु को संदिग्ध परिस्थितियों में देखा। नाका पार्टी को देख उसने अपना रास्ता बदल लिया था। इससे नाके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उसका पीछा किया और उसे पकड़ लिया।

शख्स की तलाशी लेने पर उसके कब्जे से एके-47 के 20 कारतूस मिले। उसे उसी समय गिरफतार कर लिया गया। आदिल दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकियों के नामी ओवरग्राऊंड वर्करों में गिना जाता है। वह हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी वसीम अहमद वगे उर्फ सैफुल्ला और इशफाक ठोकर उर्फ अबरार के लिए काम करता है। पूछताछ के दौरान उसने ओके-कुलगाम के रहने वाले अपने एक अन्य साथी मुदस्सर अहमद मीर का नाम भी लिया। 

उसने बताया कि उसे व मुदस्सर को एसाल्ट राइफल के 40 जिंदा कारतूस कांस्टेबल शब्ब्बीर अहमद मलिक ने दिए है। पुलिस ने आदिल से मिली जानकारी के आधार पर शब्बीर अहमद को गत शाम को हिरासत में लिया गया। उसने पूछताछ में कांस्टेबल नजीर अहमद का नाम लिया और बताया कि कारतूस नजीर ने ही उस तक पहुंचाए थे और उसने आगे यह आदिल को दिए।

हालांकि एसएसपी ने इस मामले में अन्य जानकारी देने से इंकार करते हुए कहा कि अभी पूछताछ जारी है। कुछ और पुलिसकर्मी भी उनके साथ शामिल हो सकते हैं। इसलिए पूरे मामले की गहन छानबीन की जा रही है। इस बीच,संबधित सूत्रों ने बताया कि नजीर ने जिला पुलिस लाईन शोपियां की कोत में जहां हथियारों का जखीरा जमा रहता है,में तैनाती का फायदा उठाकर ही कारतूस गायब किए थे।

आतंकियों को बेचते थे कारतूस
वह इन कारतूसों को अपने कुछ अन्य साथी पुलिसकर्मियों की मदद से आतंकियों को बेच रहा था और बदले में मोटी रकम लेता था। सूत्रों ने बताया कि यह गोरखधंधा बीते कई माह से चल रहा था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सरहद पार से हथियारों की सप्लाई में कमी होने के बाद से ही आतंकी संगठनों ने अब पुलिस संगठन में शामिल कुछ काली भेड़ों के साथ सांठ-गांठ कर ली है और वह इनके जरिए सरकारी हथियार व गोला बारुद अपने लिए जुटा रहे हैं। फिलहाल,इस पूरे मामले की जांच जारी है। सभी पुलिस थानों,सुरक्षा शिविरों और जिला पुलिस लाईनों की कोत में हथियार व गोला-बारुद की जांच की जा रही है।