प्रदेश विशेष
गुजरात में कांग्रेस ने 41 तो भाजपा ने 36 पाटीदारों पर खेला दांव
अहमदाबाद,28/नवम्बर/2017(ITNN)>>> गुजरात चुनाव में कांग्रेस ने पाटीदारों को सबसे अधिक 41 टिकट दिए हैं जबकि भाजपा ने 45 से अधिक सीटों पर ओबीसी पर दांव लगाया है। कांग्रेस व भाजपा ने कई सीटों पर अपने पुराने नेताओं को फिर से मैदान में उतारा है। दूसरे चरण में उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल,पूर्व मंत्री जयनारायण व्यास,कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सिद्धार्थ पटेल जैसे दिग्गज मैदान में हैं। गुजरात में दूसरे चरण के चुनाव के लिए कांग्रेस व भाजपा के प्रत्याशियों ने सोमवार को 93 सीटों के लिए नामांकन भरा। भाजपा ने रविवार देर रात 34 उम्मीदवारों की छठी सूची जारी की,जिसमें 12 विधायकों को दोबारा उतारा गया है। 

भाजपा ने इस सूची में 17 पाटीदार नेताओं को टिकट दिया है। गुजरात चुनाव से पहले पाटीदार आरक्षण आंदोलन,दलित व ओबीसी आंदोलन के चलते सबकी नजर इस बात पर थी कि इस चुनाव में इन जातियों को कितनी टिकटें मिलती हैं। पाटीदार नेता हार्दिक पटेल का साथ मिलने के बाद कांग्रेस ने इस बार जमकर उनके तबके के नेताओं को टिकट दिए। कांग्रेस ने 41 जबकि भाजपा ने 36 पाटीदारों को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने 35 के करीब टिकटें ओबीसी को जबकि भाजपा ने 45 से अधिक सीटों पर इस तबके के नेताओं को मैदान में उतारा है। 

इनके अलावा 36 पाटीदार, 28 आदिवासी, 13 दलित, 10 क्षत्रिय, 4 ब्राम्हण व दस से अधिक महिलाएं भाजपा की सूची में हैं। उधर कांग्रेस ने 21 कोली पटेल, 27 आदिवासी, 13 दलित, 11 क्षत्रिय, 6 मुस्लिम,3 ब्राम्हण व 7 महिलाओं को मैदान में उतारा है। इस चुनाव में दिग्गज नेता शंकर सिंह वाघेला व उनके पुत्र महेंद्र सिंह वाघेला चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। अंतिम समय तक महेंद्र के भाजपा से चुनाव लड़ने की चर्चा थी। उधर,कांग्रेस ने हार्दिक का केस लड़ने वाली वकील बीएम मांगुकिआ को ठक्कर बापा नगर अहमदाबाद,पूर्व अध्यक्ष सिद्धार्थ पटेल को डभोई से मैदान में उतारा है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वडोदरा में रोड शो के दौरान उनके काफिले पर चूड़ियां फेंकने वाली आशावर्कर चंद्रिका बेन सोलंकी वडोदरा से निर्दलीय चुनाव लडे़ंगी। उन्हें कांग्रेस से टिकट मिलने की उम्मीद थी लेकिन पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया। पीएम मोदी बीती 22 अक्टूबर को वडोदरा आए थे। उस दौरान उनके काफिले पर चंद्रिका बेन ने चूड़ियां उछाली थीं। राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। चंद्रिका लंबे समय से आशावर्कर के वेतन व उनकी स्थायी नियुक्ति के लिए आंदोलन चला रही हैं।