आध्यात्म  :: जीवन दर्शन
नारद पत्रकार ही नहीं, जनउद्धारक थे
देव ऋषि नारद या नारद मुनि ब्रह्माजी के पुत्र और भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त हैं। वह इधर की बात उधर करके, दो लोगों के बीच आग लगाने के लिये काफी प्रसिद्ध हैं। माना जाता है कि उन्हंे सब खबर रहती हैं कि सम्पूर्ण ब्रहमाण्ड में कहाँ क्या हो रहा हैं। मूंह पर नारायण नारायण और हाथ में वीणा लिये, नमक-मिर्च लगा के बातें फैलाना, एक बात को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने, लड़ाई करवाने- उसे रुकवाने, सृष्टि की किसी बड़ी घटना की आहट को पहचानकर उसे एक लोक से दूसरे लोक में पहुंचाने में उनकी महारत थी। उन्हंे दुनिया का आदि पत्रकार माना गया है।
एक अनूठा त्यौहार है अक्षय तृतीया
अक्षय तृतीया भारतीय संस्कृति एवं परम्परा का एक अनूठा एवं इन्द्रधनुषी त्यौहार है। न केवल जैन परम्परा में बल्कि सनातन परम्परा में यह एक महत्वपूर्ण त्यौहार है, इस त्यौहार के साथ-साथ एक अबूझा मांगलिक एवं शुभ दिन भी है, जब बिना किसी मुहूर्त के विवाह एवं मांगलिक कार्य किये जा सकते हैं। विभिन्न सांस्कृतिक ढांचांे में ढली अक्षय तृतीया परम्पराओं के गुलाल से सराबोर है। रास्ते चाहे कितने ही भिन्न हों पर इस पर्व त्यौहार के प्रति सभी जाति, वर्ग, वर्ण, सम्प्रदाय और धर्मों का आदर-भाव अभिन्नता में एकता प्रिय संदेश दे रहा है।
सड़कों पर मौत का सन्नाटा नहीं, जीवन का उजाला हो
सड़क हादसों और उनमें मरने वालों की बढ़ती संख्या के आंकड़ों ने लोगों की चिंता तो बढ़ाई ही है लेकिन एक ज्वलंत प्रश्न भी खड़ा किया है कि नेशनल हाइवे से लेकर राज्यमार्ग और आम सड़कों पर सर्वाधिक खर्च होने एवं व्यापक परिवहन नीति बनने के बावजूद ऐसा क्यों हो रहा है? नई बन रही सड़कों की गुणवत्ता और इंजीनियरिंग पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। इस पर केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को गंभीरता से चिन्तन करना अपेक्षित है। सड़क हादसों में मरने वालों की बढ़ती संख्या ने एक महामारी एवं भयंकर बीमारी का रूप ले लिया है। आज जो संकेत हमें मिल रहे हैं, वे बेहद चिन्ताजनक है।
कठोर तप की पूर्णता के पचास वर्ष
आज के भौतिकवादी एवं सुविधावादी युग में जबकि हर व्यक्ति अधिक से अधिक सुख भोगने के प्रयत्न कर रहा है, ऐसे समय में एक जैनसंत जैन धर्म के कठोर तप - वर्षीतप का पचासवां वर्षीतप कर एक नया इतिहास बनाया है। अध्यात्म के क्षेत्र में तप का सर्वाधिक महत्त्व है। भारत के ख्यातनामा ऋषि-महर्षि-संतपुरुष आत्मसाक्षात्कार के लिए बड़ी-बड़ी तपस्याएँ करते रहे हैं और उत्कृष्ट कोटि की साधना में लीन रहे हैं। जो एक आत्मा को समग्र रूप से जान लेता है वह पूरे ब्रह्मांड को जान लेता है। आत्मा की पहचान अथवा आत्मोपलब्धि के बाद व्यक्ति में होने वाली युगदर्शन की क्षमता सहज ही पुष्ट हो जाती है। इस दृष्टि से उसी युगद्रष्टा को प्रशस्त माना जा सकता है, जो परमार्थ की वेदिका पर खड़ा होकर युगबोध देता है।
गणगौर: नारी शक्ति और संस्कार का पर्व
गणगौर का त्यौहार सदियों पुराना हैं। हर युग में कुंआरी कन्याओं एवं नवविवाहिताओं का अपितु संपूर्ण मानवीय संवेदनाओं का गहरा संबंध इस पर्व से जुड़ा रहा है। यद्यपि इसे सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मान्यता प्राप्त है किन्तु जीवन मूल्यों की सुरक्षा एवं वैवाहिक जीवन की सुदृढ़ता में यह एक सार्थक प्रेरणा भी बना है।
भारत इतना दुखी देश क्यों है?
संयुक्त राष्ट्रसंघ हर साल एक रपट जारी करता है, जिसका नाम है- सुखी देश की अनुक्रमणिका याने कौनसा देश कितना सुखी है। इस बार अपनी 2017 की वार्षिक रपट में उसने भारत को 122 वें स्थान पर बिठाया है। लगभग डेढ़ सौ देशों में भारत का स्थान इतना नीचे है, जितना कि अफ्रीका के कुछ बेहद पिछड़े देशों का है। पिछले एक साल में भारत 118 से चार सीढ़ियां फिसलकर 122 वें पायदान पर क्यों चला गया है? मोदी-जैसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री के रहते हुए अच्छे दिन आने चाहिए थे लेकिन यह बुरे दिनों की शुरुआत क्यों हो गई है?
दुःख को सुख में बदलने का दृष्टिकोण
आजतक कोई ऐसा व्यक्ति नहीं हुआ, जिसका जीवन मुक्तिमुक्त हो हर व्यक्ति को कोई-न-कोई समस्या से ग्रस्त और परेशान है। इसीलिए दुःख को जीवन की दिव्य या आर्यस्त्य बताया गया है। दुःख का निवारण कैसे हो? इसकी खोज में अनंत काल से मनीषियों ने अपना जीवन लगाया और पाया कि दुख का कारण है और इसका निवारण भी है। दुख की कई वजहें हैं सबसे बड़ा कारण है, इच्छा या कामना चाहे का न हो और अनचाहे का हो जाना दुःख का मूल कारण है हम जन्म से ही कुछ-न-कुछ चाहते हैं और चाह की पूर्ति नहीं होने पर हम दुखी हैं।
इन 9 आदतों को छोड़ने से खुश होते है नवग्रह
आदतें जाने-अनजाने में ही सही रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं। ज्योतिष शास्त्र में ऐसी ही कुछ आदतों की सुधारने की सलाह दी गई है। ऐसी ही 9 आदतें बताईं गई हैं। ये नौ आदतें नवग्रहों के सम्मान से संबंधित हैं। यदि आप अपनी जिंदगी में इन आदतों को आत्मसात करते हैं, तो आपका घर भी संवर जाता है।
हर व्यक्ति के जीवन में दु:ख का एक मात्र कारण और उपचार यह है
अंधकार एक नकारात्मक सत्ता है, प्रकाश का अभाव है। यह प्रकाश कई बार परिस्थितियों के कारण भी लुप्त हो जाता है, किन्तु वैसी स्थिति में परमात्मा ने मनुष्य को वैसी क्षमता दे रखी है कि वह उनका उपयोग कर प्रकाश के अभाव को दूर कर सके। लेकिन अंधकार को देख-देख कर ही जिसे भयभीत होते रहना हो, परेशान और दुखी रहना हो, तो उसके लिए अंधकार से मुक्त होने का कोई उपाय नहीं है।