आध्यात्म  :: व्रत-त्यौहार
नवरात्र में इन लोगों को नहीं रखने चाहिए उपवास
नवरात्रि पर देवी पूजन और नौ दिन के व्रत का बहुत महत्व है। मां दुर्गा के नौ रूपों की अराधना का पावन पर्व शुरू हो रहा है। इन नौ दिनों में व्रत रखने वालों के लिए कुछ नियम होते हैं। सबसे पहले तो जानते हैं किन लोगों को व्रत नहीं रखना चाहिए। गर्भवती महिलाओं के लिए व्रत निषेध बताया गया है। जो महिलाएं संतान को जन्म देने वाली हैं,उन्हें व्रत नहीं रखना चाहिए।
गुरुवार व्रत से प्राप्त होते है धन और पुत्र
रुवार व्रत से दूर होते हैं वैवाहिक दोष और मिलती है आर्थिक समृद्धि। धार्मिक दृष्टि से गुरु यानि बृहस्पति देवगुरु हैं। वह ज्ञान के देवता भी माने जाते हैं। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार गुरु को व्यक्ति की किस्मत या भाग्य का निर्णायक भी माना गया है। गुरु को शुभ,सौम्य ग्रह माना जाता है।स्त्री-पुरुष दोनों के सुखद वैवाहिक जीवन में गुरु की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
मंगलकर्ता और विघ्नहर्ता हैं हनुमान
भगवान हनुमानजी को हिन्दू देवताओं में सबसे शक्तिशाली माना गया है, वे रामायण जैसे महाग्रंथ के सह पात्र थे। वे भगवान शिव के ग्यारवें रूद्र अवतार थे जो श्रीराम की सेवा करने और उनका साथ देने त्रेता युग में अवतरित हुए थे। उनको बजरंग बलि, मारुतिनंदन, पवनपुत्र, केशरीनंदन आदि अनेकों नामों से पुकारा जाता है। उनका एक नाम वायुपुत्र भी है, उन्हें वातात्मज भी कहा गया है अर्थात् वायु से उत्पन्न होने वाला। इन्हें सात चिरंजीवियो में से एक माना जाता है। वे सभी कलाओं में सिद्धहस्त एवं माहिर थे। वीरो में वीर, बुद्धिजीवियो में सबसे विद्वान।
संतान प्राप्ति की कामना पूरी करती हैं स्कंदमाता
आज नवरात्र का पांचवां दिन है, आज के दिन मां दुर्गा के पांचवे अवतार देवी स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इनकी पूजा कुश या कंबल के आसन पर बैठ कर पूजा करें। मां स्कंदमाता की पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है। मां को प्रसन्न करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। मोक्ष का मतलब होता है हर मुसीबत से छुटकारा पाना।
चैत्र नवरात्र: चौथे दिन मां के 'कुष्माण्डा' स्वरूप की पूजा से मिलता है तेज और प्रताप
नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के 9 रूपों की पूजा की जाती है। नवदुर्गा हिंदु धर्म में माता दुर्गा या पार्वती के 9 रूपों को एक साथ कहा जाता है। इन्हें पापों की विनाशिनी कहा जाता है। हर देवी के अलग-अलग वाहन हैं, अस्त्र-शस्त्र हैं। आज नवरात्रि का चौथा दिन है। आज मां कुष्माण्डा की पूजा-अर्चना की जाती है। ये नवदुर्गा का चौथा स्वरुप हैं।
जाने क्या है गणगौर पूजा का विधा-विधान
चैत्र शुक्ल तृतीया का दिन गणगौर पर्व के रूप में मनाया जाता है। इसे गौरी तृतीया भी कहते हैं। यह पर्व विशेष तौर पर केवल स्त्रियों के लिए ही होता है। इस दिन भगवान शिव ने पार्वतीजी को तथा पार्वतीजी ने समस्त स्त्री-समाज को सौभाग्य का वरदान दिया था। इस दिन सुहागिनें दोपहर तक व्रत रखती हैं। स्त्रियाँ नाच-गाकर, पूजा-पाठ कर हर्षोल्लास से यह त्योहार मनाती हैं।
नवरात्रि के शुभ दिनों में भूलकर भी न करें ये काम
नवरात्रि पर देवी पूजन और नौ दिन के व्रत का बहुत महत्व है। मां दुर्गा के नौ रूपों की अराधना का पावन पर्व शुरू हो रहा है। इन नौ दिनों में व्रत रखने वालों के लिए कुछ नियम होते हैं।
कैसे करें शनिवार का व्रत
जीवन में अभाव से मतलब मात्र धन की कमी ही नहीं, बल्कि उससे भी ज्यादा कर्म, विचार और बुद्धि के अभाव से है, जो तमाम दु:खों का कारण बनते हैं। इसलिए शास्त्रों में कर्म दोष से छुटकारा जरूरी बताया गया है। हिन्दू धर्म में कर्म दोष का दण्ड और उससे मुक्त करने वाले देवता शनिदेव माने जाते हैं। शनि देव विलक्षण शक्तियों वाले देवता हैं। जिस तरह कुल या परिवार के अच्छे-बुरे संस्कार का प्रभाव अगली पीढ़ी या संतानों में देखा जाता है। वैसे ही जगत की आत्मा व ईश्वर का रूप माने जाने वाले तेजस्वी सूर्य पुत्र होने से शनि भी बेजोड़ शक्तियों के देवता है।
होली के रंगों का आध्यात्मिक महत्व
होली भारत का एक विशिष्ट सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक त्यौहार है। अध्यात्म का अर्थ है मनुष्य का ईश्वर से संबंधित होना या स्वयं का स्वयं के साथ संबंधित होना है। इसलिए होली मानव का परमात्मा से एवं स्वयं से स्वयं के साक्षात्कार का पर्व है। होली रंगों का त्यौहार है। रंग सिर्फ प्रकृति और चित्रों में ही नहीं हमारी आंतरिक ऊर्जा में भी छिपे होते हैं, जिसे हम आभामंडल कहते हंै। एक तरह से यही आभामंडल विभिन्न रंगों का समवाय है, संगठन है। हमारे जीवन पर रंगों का गहरा प्रभाव होता है, हमारा चिन्तन भी रंगों के सहयोग से ही होता है। हमारी गति भी रंगों के सहयोग से ही होती है। हमारा आभामंडल, जो सर्वाधिक शक्तिशाली होता है, वह भी रंगों की ही अनुकृति है।
आज का नंदनगरी में लठमार होली, जानिए क्या है इसका महत्व
लठमार होली पहले बरसााना में खेली जाती है दूसरे दिन नंदगाँव में यहां पर बरसाना के हुरिया और नंदगाँव की हुरियारिनों के बीच लाठी-ढाल के खेल को देखने के लिए मिलते हैं। कृष्ण जन्मस्थल का लठमार हुरांगा 8 मार्च को होगा इस दिन दोपहर दो बजे से यहां पर लीला मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच होली की धूम मचेगी। शाम में 4 बजे के करीब रावल के हुर्रे और हुरियारेन्स बीच लठमार होली होगी।
जाने प्रदोष व्रत मे क्यों और कैसे किया जाता है भगवान शिव का पूजन
प्रदोष व्रत में भगवान शिव की उपासना की जाती है। यह व्रत हिंदू धर्म के सबसे शुभ व महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार प्रदोष व्रत चंद्र मास के 13 वें दिन (त्रयोदशी) पर रखा जाता है। माना जाता है कि प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के पाप धूल जाते हैं और उसे मोक्ष प्राप्त होता है।
जाने वसंत पंचमी का महत्व और उससे जुड़ी कथा
भारत त्योहारो का देश है, यंहा पर्त्येक अवसर को त्योहार के रूप में मनाकर अपनी ख़ुशी का इजहार किया जाता है मैं हमारे देश के त्योहार केवल धार्मिक अवसरों को ध्यान में ही रखकर नही मनाये जाते बल्कि ऋतु परिवर्तन के मौके का भी पर्व के रूप में ही स्वागत किया जाता है। ऋतु परिवर्तन का ऐसा ही एक त्यौहार है बसंत पंचमी मैं यह ऋतु अपने साथ कई परिवर्तन लेकर आती है मैं कभी सुखकर दरकती धरती, तो कभी उसे रिमझिम फुहारों से भिगोकर मनाने कि चेस्टा करते देख, कभी शरद कि कुनकुनी धुप तो घने कोहरे मैं किसी उदास मन सी उलझी उलझी यह धरती मैं मानो जैसे जो कुछ भी इंसान के मन में चल रहा है, यही प्रकृति में भी प्रतिबिंबित हो रहा है।
मकर संक्रांति पर विशेष - सूर्य उपासना का पर्व है मकर संक्रांति
भारत में समय-समय पर अनेक त्यौहार मनाए जाते हैं। इसलिए भारत को त्योहारों का देश कहना गलत न होगा। कई त्योहारों का संबंध ऋतुओं से भी है। ऐसा ही एक पर्व है। मकर संक्रान्ति। मकर संक्रान्ति पूरे भारत में अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तब इस त्यौहार को मनाया जाता है। दरअसल, सूर्य की एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने की प्रक्रिया को संक्रांति कहते हैं। सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, इसलिए इसे मकर संक्रांति कहा जाता है।
शुरू हुआ मलमास, दान-पुण्य बनाएगा धनवान
सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में परिवर्तन को संक्रान्ति कहते हैं। जब दो पक्षों में संक्रान्ति नहीं होती है, तब अधिक मास होता है, जिसे मलमास या फिर खरमास भी कहते है। यह स्थिति 32 माह और 16 दिन में होती है यानि लगभग हर तीन वर्ष बाद मलमास पड़ता है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी- इस साल हैं महासंयोग
धर्मस्थापना और पाप का नाश करने वाले श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जता हैं। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होने पर इस तिथी को जन्माष्टमी कहा जाने लगा। इस दिन आधी रात को भगवान ने अत्याचारी कंस के वध के लिए एक बार फिर मानवावतार लिया था।