आध्यात्म
नहाय खाय के साथ ही आज से 4 दिन का छठ पर्व शुरू हो गया है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर छठ को लेकर कई तरह के मैसेज वायरल हो रहे हैं। इन्हीं में से एक मैसेज में कहा जा रहा है कि छठ पूजा जरूरी है,धर्म के लिए नहीं,बल्कि जड़ों से जुड़े रहने के लिए। मैसेज में आगे कहा गया है कि ये छठ जरूरी है,हम-आप सभी के लिए,जो अपनी जड़ों से कट रहे हैं। उन बेटों के लिए जिनके घर आने का ये बहाना है।
हमारे देश में मकर संक्रांति के पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है यानी कि पृथ्वी का उत्तरी गोलार्धा सूर्य की तरफ चला जाता है। देश के विभिन्न राज्यों में इस पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है, हालांकि प्रन्येक राज्य में इसे मनाने का तरीका जुदा भले ही हो, लेकिन सब जगह सूर्य की उपासना जरूर की जाती है।
देव ऋषि नारद या नारद मुनि ब्रह्माजी के पुत्र और भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त हैं। वह इधर की बात उधर करके, दो लोगों के बीच आग लगाने के लिये काफी प्रसिद्ध हैं। माना जाता है कि उन्हंे सब खबर रहती हैं कि सम्पूर्ण ब्रहमाण्ड में कहाँ क्या हो रहा हैं। मूंह पर नारायण नारायण और हाथ में वीणा लिये, नमक-मिर्च लगा के बातें फैलाना, एक बात को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने, लड़ाई करवाने- उसे रुकवाने, सृष्टि की किसी बड़ी घटना की आहट को पहचानकर उसे एक लोक से दूसरे लोक में पहुंचाने में उनकी महारत थी। उन्हंे दुनिया का आदि पत्रकार माना गया है।