आध्यात्म
नहाय खाय के साथ ही आज से 4 दिन का छठ पर्व शुरू हो गया है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर छठ को लेकर कई तरह के मैसेज वायरल हो रहे हैं। इन्हीं में से एक मैसेज में कहा जा रहा है कि छठ पूजा जरूरी है,धर्म के लिए नहीं,बल्कि जड़ों से जुड़े रहने के लिए। मैसेज में आगे कहा गया है कि ये छठ जरूरी है,हम-आप सभी के लिए,जो अपनी जड़ों से कट रहे हैं। उन बेटों के लिए जिनके घर आने का ये बहाना है।
जन्माष्टमी योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के तौर पर मनाया जाता है। कृष्ण भारतीय मानस के नायक हैं। कृष्ण का चरित्र रससिक्त है, दार्शनिक होने के साथ-साथ व्यावहारिक भी हैं. संक्षेप में कृष्ण जीवन का प्रतिबिंब हैं। इसलिए वह नैतिक-अनैतिक, सत-असत से ऊपर हैं। कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव है।
देव ऋषि नारद या नारद मुनि ब्रह्माजी के पुत्र और भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त हैं। वह इधर की बात उधर करके, दो लोगों के बीच आग लगाने के लिये काफी प्रसिद्ध हैं। माना जाता है कि उन्हंे सब खबर रहती हैं कि सम्पूर्ण ब्रहमाण्ड में कहाँ क्या हो रहा हैं। मूंह पर नारायण नारायण और हाथ में वीणा लिये, नमक-मिर्च लगा के बातें फैलाना, एक बात को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने, लड़ाई करवाने- उसे रुकवाने, सृष्टि की किसी बड़ी घटना की आहट को पहचानकर उसे एक लोक से दूसरे लोक में पहुंचाने में उनकी महारत थी। उन्हंे दुनिया का आदि पत्रकार माना गया है।