म. प्र. के जिले  :: हरदा
हरदा में भावान्तर योजना में पंजीयन नहीं होने से किसान परेशान
हरदा जिले में भावान्तर योजना में पंजीयन नहीं होने से किसान परेशान है. जिले में सहकारी समितियों की हड़ताल का असर दिखाई दे रहा है. हड़ताल के कारण गावों में चने और गेहूं खरीदी के पंजीयन नहीं हो पा रहे हैं. हरदा जिले में इस वर्ष 75 हजार हेक्टेयर में चना और 1 लाख हेक्टेयर ज़मीन में गेहूं का उत्पादन हो रहा है.
सड़क पर तड़पते रहे 26 बच्चे,एम्बुलेंस ड्राइवर को लेकर रवाना
मध्य प्रदेश के हरदा में 26 स्कूली बच्चों से भरा वाहन सड़क किनारे उतर गया और पलटते-पलटते बच गया. इस घटना में ड्राइवर सहित सात बच्चों को सामान्य चोटें आईं. हैरत की बात यह रही कि मौके पर पहुंची एम्बुलेंस घायल बच्चों को छोड़कर ड्राइवर को लेकर रवाना हो गई.
प्लांट में जैविक खाद बनाकर लाखों कमा रहे हैं यहां के आदिवासी
मध्य प्रदेश में हरदा जिले के आदिवासी ग्रामीण जैविक खाद बना रहे हैं. आदिवासी ग्रामीणों की समिति जैविक खाद वन विभाग और किसानो को बेचकर साल में 2 लाख रूपये का लाभांश कमा रही है. हरदा जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर बसे वनांचल का गांव बड़झिरी कुल 220 परिवारों का है. इस गांव में आदिवासी ग्रामीण वनविभाग द्वारा बनाए गए कम्पोस्ट प्लांट में जैविक खाद बना रहे है.
सीएम के आश्वासन के बाद भी टॉपर काे नहीं मिली आर्थिक मदद
मध्य प्रदेश के हरदा जिले में बालिकाओं के शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है. दूसरी तरफ साल 2015 में नीमगांव की ज्योति विश्नोई ने 12वीं में 500 में से 488 अंक लाकर 97.6 प्रतिशत के साथ पूरे प्रदेश में टॉप किया था.आर्थिक परेशानियों के चलते ज्योति की आगे की पढ़ाई कर्ज से चल रही है. ज्योति की आगे की पढ़ाई के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए तत्कालीन कलेक्टर रजनीश श्रीवास्तव से बात करके एक साल की फीस भरने की मौखिक स्वीकृति दी थी.
कमल पटेल ने हरदा में अवैध खनन को लेकर शिवराज को लिखा पत्र
रेत के अवैध खनन को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता कमल पटेल ने हरदा में नर्मदा नदी में रेत खनन को लेकर एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है. कमल पटेल ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर कहा है कि प्रतिबंध के बाद भी हरदा जिले में अवैध खनन कर रेत का स्टॉक किया जा रहा है. खनिज विभाग ने कलेक्टर को अधिकार दिए हैं बावजूद इसके कलेक्टर श्रीकांत बनोठ रेत जब्त नहीं कर रहे हैं. इससे साफ होता है कि सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का रेत माफियाओं को खुला संरक्षण है.