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Article
साहित्य-संस्कृति  :: लेख
राजभाषा दर्जें से आगे हिन्‍दी
14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 1949 में इसी तारीख को संविधान सभा ने एक लंबी और सजीव बहस के बाद देवनागरी लिपि में हिंदी को भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में अपनाया था। भारतीय संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 343 से 351 तक इसी विषय के बारे में है। अनुच्‍छेद 343 (1) में यह घोषणा की गई है कि देवनागरी लिपि में हिंदी संघ की राजभाषा होगी।
ग्लोबलगिविंग की भारत में संभावनाभरी दस्तक
दुनियाभर के दानदाताओं को भारत में दान के लिये प्रोत्साहित किये जाने की दृष्टि से क्राउडफंडिंग एक सशक्त माध्यम है। भारत के लिए क्राउडफंडिंग भले ही नया हो पर इसकी अपार संभावनाएं हैं। आने वाले समय में क्राउडफंडिंग भारत की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, सेवा उपक्रमों एवं धार्मिक कार्यों के लिये दान की उपलब्धता का बेजोड़ माध्यम होगा। भारत के सुनहरे भविष्य के लिए क्राउडफंडिंग अहम भूमिका निभा सकती है और क्राउडफंडिंग भारत में काफी सफल भी हो सकता है क्योंकि यहां अमीर-गरीब के बीच गहरी खाई है।
नक्सली सफल क्यों होते हैं?
छत्तीसगढ़ के नक्सलियों के खिलाफ फौज के इस्तेमाल की बात मैंने कल लिखी थी लेकिन राज्य सरकार के पुलिस विभाग को भी कसना उतना ही जरूरी है। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और सुकमा में इतने जवान मारे गए लेकिन जिम्मेदारी किसने ली? किसी ने भी नहीं। क्या प्रदेश के गृह मंत्री ने इस्तीफा दिया। नहीं! केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों ने अपनी जान दे दी लेकिन केंद्र या प्रदेश के किसी भी मंत्री ने अपने आप इस्तीफा तक नहीं दिया।
अज़ान पर फिजूल की बहस
अज़ान को लेकर हमारे टीवी चैनलों और अखबारों में फिजूल की बयानबाजी हो रही है। यदि सिने-गायक सोनू निगम ने कह दिया कि सुबह-सुबह मस्जिदों से आने वाली तेज आवाजें उन्हें तंग कर देती हैं और यह जबरिया धार्मिकता ठीक नहीं तो इसमें उन्होंने ऐसा क्या कह दिया कि उन्हें इस्लाम का दुश्मन करार दे दिया जाए और उन्हें गंजा करने वाले को दस लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा कर दी जाए?
अमित शाह के लिए 11 सूत्र
भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में गंगा से गोदावरी तक भाजपा की सरकारें बनाने का आह्वान किया है। वे पंचायत से पार्लियामेंट तक अपनी सरकारें खड़ी करना चाहते हैं। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए उन्होंने भाजपा कार्यकर्त्ताओं से कहा है कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्त्ताओं की तरह पूर्णकालिक बनें। उनके इस प्रस्ताव की स्वीकृति में लगभग 4 लाख कार्यकर्त्ताओं ने हाथ उठाए। कुछ ने एक साल, कुछ दस माह और कुछ ने 15 दिन पूर्णकालिक बनने का संकल्प किया। यह अमित शाह की अदभुत पहल है। संघ के साथ जुड़कर भाजपा के कार्यकर्ता राष्ट्र का रुपांतर कर सकते हैं लेकिन बड़ा सवाल यह है कि वे अपने पूरे समय में करेंगे क्या?
यह कैसा ‘बड़ों का सदन’?
संविधान के मुताबिक वित्त विधेयक को पास करने का अधिकार सिर्फ लोकसभा को है। राज्यसभा उस पर बहस तो कर सकती है लेकिन उसे गिरा नहीं सकती। इस बार लाए गए इस वित्त विधेयक में सरकार ने 40 संशोधन पेश किए हैं। राज्यसभा के विरोधी सदस्यों का कहना है कि इन संशोधनों का का वित्त विधेयक से क्या लेना-देना है? इनमें से कई संशोधन ऐसे हैं, जिन पर राज्यसभा में मतदान होना चाहिए। राज्यसभा ने उन पर मतदान करके उन्हें गिरा भी दिया है। ऐसे पांच संशोधन हैं, जिन्हें उसने रद्द कर दिया है।
भोजन की बर्बादी एक त्रासदी है
हर रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संवेदनशील एवं सामाजिक हो जाते हैं। देश की जनता से ‘मन की बात’ करते हुए वे सामाजिक, पारिवारिक एवं व्यक्तिगत मुद्दों को उठाते है और जन-जन को झकझोरते हैं। इसी श्रंखला की ताजा कड़ी में देशवासियों को भोजन की बर्बादी के प्रति आगाह किया। भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश के लिए यह पाठ पढ़ना जरूरी है। क्योंकि एक तरफ विवाह-शादियों, पर्व-त्यौहारों एवं पारिवारिक आयोजनों में भोजन की बर्बादी बढ़ती जा रही है, तो दूसरी ओर भूखें लोगों के द्वारा भोजन की लूटपाट देखने को मिल रही है।
उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ ही क्यों?
संत परंपरा का निर्वहन करते हुए राजनीति में आए योगी आदित्यनाथ पर यह आरोप सदैव से लगते रहे हैं कि वे हिन्दुत्व की राजनीति करते हैं, चुनावों में एक वर्ग विशेष, धर्म-संप्रदाय से जुड़े वोटों का ध्रुवीकरण करते हैं और जरूरत पड़े तो वे तीन तलाक, लव जिहाद, मदरसा, कब्रिस्ता न जैसे धर्म आधारित विवादित बयान देने से पीछे नहीं रहते । उनके तमाम पुराने बयानों को एक बार में देखने पर यही लगता है कि वे अल्पतसंख्यक समाज खासकर मुसलमानों के धुरविरोधी हैं।
यह एक क्रांति की शुरुआत है
यह एक क्रांति की शुरूआत है। उत्तरप्रदेश की जनता जनार्दन को सादर नमन। यह चुनाव नतीजे नहीं है। यह सिर्फ जनादेश भी नहीं है। किसी भी लोकतांत्रिक देश में चुनाव के बाद सरकारें आती हैं, सरकारें जाती हैं। पर उत्तरप्रदेश की जनता ने सिर्फ सरकार का परिवर्तन नहीं किया है। यह शुरूआत है एक नई क्रांति की। 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में सिर्फ एक खण्डहर को नहीं ढहाया गया था। आज से 25 साल पहले देश का स्वाभिमान जाग्रत हुआ और विदेशी लुटेरे के कलंक को नेस्तनाबूत कर दिया गया। स्वाधीनता के पश्चात् देश के अपने कर्णधारों ने खड़ा किया जातिवाद का महल भाई भतीजावाद, परिवारवाद का किला, भ्रष्टाचार की मीनारें और उससे भी आगे बढ़कर देश को तोड़ने के लिए तुष्टिकरण के गुम्बद।
आर्यसमाज जगे तो देश उठे
दो दिन मैंने हैदराबाद में बिताए। मैं सोचता रहा कि निजाम के विरुद्ध आर्यसमाज ने जबर्दस्त आंदोलन न छेड़ा होता तो क्या आज हैदराबाद भारत का हिस्सा होता? हैदराबाद तो क्या, भारत की आजादी और एकता में जो योगदान महर्षि दयानंद और आर्यसमाज का था, उसके आगे सिर्फ गांधी की कांग्रेस ही टिक सकती है। कांग्रेस की भी असली ताकत आर्यसमाज ही था। इसके पहले कि कांग्रेस और गांधी का उदय हुआ महर्षि दयानंद ने स्वतंत्रता का शंखनाद कर दिया था। उन्होंने आजादी की नींव पक्की कर दी थी।
पश्चिमी नेताओं का अतिवाद
अमेरिका और यूरोप के राष्ट्रों में राष्ट्रवाद के नाम पर कितना अतिवाद हो रहा है, इसके ताजा प्रमाण अभी-अभी सामने आए हैं। अमेरिका के केन्सास शहर में एक गोरे अमेरिकी ने दो भारतीयों पर गोलियां चला दीं और कहा कि तुम अमेरिका से भाग जाओ। इधर पेरिस में फ्रांस की दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी नेता श्रीमती ली पेन ने कहा है कि अगर वे राष्ट्रपति बन गईं तो वे बुर्के, सिर के दुपट्टे और यहूदी टोपी पर प्रतिबंध लगा देंगी। हर फ्रांसीसी नागरिक पहले फ्रांस का नागरिक है, फिर किसी मजहब का सदस्य है। चौबीसों घंटे उसे अपनी मजहबी पहचान को हिलाते रहने की क्या जरुरत है? जब वह मस्जिद या चर्च या साइनेगोग में जाए तब वह अपना मजहबी लिबास धारण करे लेकिन हर जगह अपनी मज़हबी पहचान को प्रदर्शित करते रहने का मतलब है- आपका मजहब ऊपर है और आपका देश नीचे है। इसके अलावा इन पहचान-चिन्हों के कारण राष्ट्रीय एकता भी कमजोर पड़ती है। लोगों में अपने अलग होने की भावना भी पनपती है।
मोबाइल फोनः क्या करें?
मेरे हजारों मित्र और परिचित देश-विदेश में फैले हुए हैं, उनमें से सिर्फ दो ऐसे हैं, जो मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करते। एक उद्योगपति हैं और दूसरे नेता हैं। दोनों ही 80 के ऊपर हैं। इनके अलावा किसके पास मोबाइल फोन नहीं है? सबके पास है। इस फोन को कौन कितनी बार और क्यों देखता है, इसकी कोई गिनती नहीं है। मुझे औसतन 100 बार रोज बात करनी होती है। कई बार आधा-आधा घंटा सुनते रहना पड़ता है। सुनने-सुनाने के अलावा व्हाट्साप, एसएमएस और इंटरनेट भी आपको मोबाइल से उलझाए रखते हैं।
लो भाई शुरू हो गया जीओ द्वारा ग्राहक की लूट!
पहले तो अपने काले धन को साफ करने के लिए जिया ने मुफ्त में कॉलिंग और डेटा उपलब्ध कराने के लिए सुविधाएं दीं, और अपना काला धन सफेद कर लिया। जब काला धन सफेद हो गया और पूरे विश्व के लोग जियो के ग्राहक बन गए, तब जीओ ने लूट करना शुरू किया। जीओ ने 303 रुपए मासिक और 99 रुपए का वार्षिक शुल्क में मासिक कुल 312 रुपए में लोकल एसटीडी। कॉल आसीमित ऑफ़ किया हुआ है जीओ, पहले तो लोगों को मुफ्त में कॉलिंग और नेट सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ग्राहकों को अपने जाल में फसाया अब जब विश्व के ग्राहक उसके जाल में फंस गए तब शुरू हुआ लूट का खेल जीओ ने 99 रुपये का वार्षिक सदस्य शुक्ल लेना शुरू किया, 99 रुपये की जगह से वह 100 रुपये वसूल कर रहा है।
भारत-चीन संवाद
विदेश सचिव सु. जयशंकर ने चीन के नेताओं और अफसरों से वहां जाकर जो संवाद कायम किया है, उससे बेहतर तरीका फिलहाल क्या हो सकता है? इस समय विवाद के तीन तात्कालिक मुद्दे हैं। पहला, जैश-ए-मुहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर संयुक्तराष्ट्र का प्रतिबंध और इस प्रतिबंध का चीन द्वारा विरोध, दूसरा, परमाणु आपूर्ति समूह में भारत की सदस्यता में चीन का अड़ंगा और तीसरा, पाकिस्तानी कब्जे के भारतीय कश्मीर में से होकर सड़क बनाने की चीनी योजना।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली हुई सुदृढ़ और असरकारी
मध्यप्रदेश में पिछले 11 वर्ष सार्वजनिक वितरण प्रणाली की वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के साथ समर्थन मूल्य पर गेहूँ-धान आदि के व्यवस्थित उपार्जन को समर्पित रहे हैं। इसके अलावा इस अरसे में प्रदेश की भण्डारण क्षमता में वृद्धि के स्टील सायलो जैसे सफल प्रयास,ई-उपार्जन,राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के सफल क्रियान्वयन,अपनी सुविधा-अपना राशन जैसी व्यवस्था, पीडीएस को पारदर्शी और ई-उपकरणों से लैस बनाने जैसे कदमों से मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर जाना गया।
नमामि देवी नर्मदे-नर्मदा सेवा यात्रा-2016
मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी नदी नर्मदा के संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने के लिये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 11 दिसम्बर से नर्मदा के उदगम-स्थल अमरकंटक से 'नमामि देवी नर्मदे''-नर्मदा सेवा यात्रा का शुभारंभ किया गया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा नदी संरक्षण अभियान है,जिसमें साधु-संत,जन-प्रतिनिधि और आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की गयी है। नर्मदा सेवा यात्रा का संचालन 144 दिन में लगभग 200 सदस्यों के कोर-ग्रुप द्वारा अमरकंटक से सोण्डवा (प्रदेश में नर्मदा प्रवाह का अंतिम स्थल) से पुन: अमरकंटक तक की यात्रा के रूप में किया जायेगा।
मध्यप्रदेश में सुशासन महज जुमला नहीं हकीकत
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अपने कार्यकाल की 11 वर्ष की सात सर्वोच्च प्राथमिकता में 'सुशासन' शामिल रहा है। इस प्राथमिकता की पूर्ति और प्रशासन को और अधिक जवाबदेह बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने सुशासन मिशन लागू किया। चौहान ने प्रदेश में आम जनता को अधिक आसानी से शासकीय सेवाएँ देने तथा उनकी शिकायतों के त्वरित निराकरण की दिशा में ऐसे कदम उठाये हैं, जिनकी व्यापक रूप से सराहना हुई और प्रदेश सुशासन की दिशा में आगे बढ़ा।
मध्यप्रदेश में सम्पत्ति के दस्तावेजों के ई-पंजीयन की व्यवस्था सम्पदा
प्रदेश में रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प विभाग राजस्व अर्जित करने वाले विभागों में प्रमुख है। विभाग की राजस्व आय में पारदर्शिता आये और दस्तावेजों का पंजीयन करवाने वाले उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण हो सके, इस उद्देश्य से पंजीयन प्रक्रिया का कम्प्यूटरीकरण किया गया है। राज्य में दस्तावेजों के पंजीयन में इस तरह की ई-सुविधा उपलब्ध करवाकर मध्यप्रदेश देश में पहला राज्य बन गया है।

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