साक्षात्कार
संदीप भुटोरिया द्वारा लिखी उनकी दूसरी बुक एक जीवंत और आकर्षक travelogue पर बेस्ड है। बुक में संदीप ने बड़े ही सरल ढंग से लाइफ और ट्रैवल के बीच की दुनिया को इस अंदाज में पेश किया है कि हर कोई इसे एक बार पढ़ने के बारे में सोचेगा जरुर। लाइफ अपने आप में एक असाधारण यात्रा है, लेकिन बाहरी दुनिया की यात्रा इससे ज्यादा रंगीन, अनूठी और अंदर की दुनिया की तुलना से कहीं ज्यादा मुश्किल भरी और चुनौतीपूर्ण है।
भारत की अदालतें जादू-टोना घर बनी हुई हैं। भारत-जैसे पूर्व गुलाम देशों की यही दुर्दशा है। अंग्रेजों की बनाई (अ) न्याय-व्यवस्था अभी तक ज्यों की त्यों चल रही है। विख्यात अंग्रेज विचारक जॉन स्टुअर्ट मिल ने लिखा था कि देर से किया गया न्याय तो अन्याय ही है। भारत की अदालतों में 3-4 करोड़ मुकदमे लटके पड़े हुए हैं, 30-30 साल से! पहली बात तो न्याय में देरी होती है और न्याय भी ऐसा होता है कि मुकदमा लड़ने वालों को यह पता ही नहीं चलता कि वे हारे हैं तो क्यों हारे हैं और जीतें हैं तो क्यों जीते हैं? ऐसा क्यों होता है? क्योंकि हमारा कानून, हमारी बहस, हमारे फैसले- सब कुछ अंग्रेजी में होते हैं।