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सरकारी बाबू जैसा पोर्टल,स्वीकार रहा गलत एंट्री,बाद में जमा नहीं हो रहा रिटर्न
इंदौर,03/अक्टूबर/2017(ITNN)>>> नई कर प्रणाली में घर बैठे आसानी से रिटर्न जमा करने का दावा फेल साबित हो रहा है। व्यापारियों की शिकायत है कि दावे के उलट जीएसटी का पोर्टल यूजर फ्रेंडली नहीं है। सॉफ्टवेयर पहले तो गलत भुगतान स्वीकार करता है। उसके बाद न तो रिटर्न जमा होता है और न ही व्यापारी सुधार कर रिटर्न जमा कर सकता है। अगले महीने के रिटर्न भी बाद में जमा नहीं हो पाते। कारोबारियों के मुताबिक ऑनलाइन प्रणाली भी किसी सरकारी बाबू की तरह फाइल अटकाने का ही काम कर रही है।

व्यापारियों के मुताबिक जीएसटी पोर्टल पर प्रारंभिक रिटर्न फॉर्म थ्री-बी जमा करने में ही ये तमाम परेशानियां आ रही हैं। कारोबारी अगली स्टेज तक तो पहुंच ही नहीं पा रहा है। व्यापारियों के मुताबिक पहले चालान में पैसा जमा करने के बाद 'थ्री-बी' में सेटऑफ रकम का आंकड़ा डालना होता है। जमा चालान से सीजीएसटी और आईजीएसटी में अलग-अलग सेटऑफ की रकम एंट्री करना होती है। अगर दोनों में से किसी भी कॉलम में रकम की एंट्री में गलती हो जाए तो पोर्टल उसे बिना किसी पॉप-अप मैसेज या संदेश दिए स्वीकार कर लेता है। 

इसके बाद जब व्यापारी रिटर्न जमा करने जाता है तो उसका रिटर्न जमा नहीं होता। इसके बाद व्यापारी चाहे कि सही या अतिरिक्त रकम जमा कर एंट्री सुधार ले तो वह विकल्प भी नहीं दिया जा रहा। एक बार ये रिटर्न रुकने पर व्यापारी परेशान होता रहता है,क्योंकि अगले महीने का थ्री-बी रिटर्न भी इस आधार पर रिजेक्ट होता है कि पिछले रिटर्न में गलती थी। इसके बाद व्यापारी पर ब्याज और पेनल्टी का बोझ आ जाता है। कर सलाहकार और चार्टड अकाउंटेंट भी कारोबारियों की शिकायत को सही करार दे रहे हैं।

बाजार से खरीदो महंगा
इस गलती से बचने के लिए मजबूरन व्यापारियों को बाजार में उपलब्ध 'एएसपी' सॉफ्टवेयर खरीदना पड़ रहा है। दरअसल सरकार ने 16 कंपनियों को एसएसपी के तौर पर जीएसटी नेटवर्क से जोड़ा है। ये कंपनी अकाउंटिंग की ऐसी परेशानियों को ठीक करने और जीएसटी रिटर्न जमा करने के लिए सॉफ्टवेयर बेच रही है। हर सॉफ्टवेयर के लिए सालाना तकरीबन 15 से 20 हजार रुपए खर्च करना पड़ रहे हैं। यह खर्च छोटे-मध्यम कारोबारियों के बूते के बाहर है।

यूजर फ्रेंडली हो आंकड़ा
कर सलाहकार और चार्टर्ड विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार को पोर्टल को यूजर फ्रेंडली बनाना चाहिए। आमतौर पर किसी भी कम्प्यूटर सिस्टम या सॉफ्टवेयर में गलत आंकड़ा या जानकारी फीड करने पर एक संदेश आता है कि आप संबंधित जानकारी को सुधारें। यदि ऐसा नहीं होता तो बाद में उसमें एडिट का विकल्प होता है। जीएसटी पोर्टल में ये दोनों ही बातें नहीं हैं। नतीजा व्यापारी के चालान में पैसा जमा है लेकिन सिर्फ गलत एंट्री के कारण उसका रिटर्न खारिज हो रहा है। इस बारे में केंद्र सरकार और जीएसटी काउंसिल को भी बताया गया है।