शहर विशेष
बेकरी में काम करने वाले की बेटी बनीं कमर्शियल पायलट,हिजाब नहीं आया आड़े
हैदराबाद,20/नवम्बर/2017(ITNN)>>> अगर आपने कोई सपना देखा हो और उसके लिए शिद्दत से मेहनत की हो तो उसके हकीकत में बदलना मुश्किल नहीं,चाहे रास्ते में कितने भी रोड़े क्यूं न आए। कुछ ऐसा ही हैदराबाद की सईदा सल्वा फातिमा के साथ हुए। हिजाब पहनने वाली फातिमा एक एयरलाइन ज्वाइन करने जा रही है। बड़ी बात यह है कि वह भारत में कर्मिशियल पायलट का लाइसेंस (सीपीएल) धारण करने वाली चार मुस्लिम महिलाओं में एक है। एक दशक पहले एक उससे जब किसी आयोजन में पूछा गया थी कि वह क्या बनना चाहती है तो उसने कहा था,मैं पायलट बनना चाहती हूं।

एक बेकरी में काम करने वाले की बेटी फातिमा के सपनों के पंख बचपन से ही लगने शुरू हो गए थे। न्यूजीलैंड में मल्टी-इंजन का प्रशिक्षण लेने और बहरीन में टाइप-रेटिंग के बाद फातिमा को अब नागरिक उड्डयन महानिदेशक के अनुमोदन का इंतजार है। इसके बाद वह एयरबस ए-320 उड़ाने में सक्षम हो जाएगी। उसके लिए यह सफर तय करना बहुत आसान नहीं था। निम्न-मध्यम वर्ग की पृष्ठभूमि वाली फातिमा ने भारत और विदेशों में हुई पूरी ट्रेनिंग के दौरान हिजाब पहना।

फातिमा के मुताबिक,मैं यूनिफॉर्म के ऊपर भी अपने सिर पर हमेशा हिजाब पहनती थी। इसे लेकर मुझे कभी कोई समस्या नहीं आई। आपकी शिक्षा और योग्यता ही है जो आपकी मदद करती है,अब वह एविएशन हो या कोई और प्रोफेशन। बहरीन स्थित गल्फ एविएशन एकेडमी में हिजाब पहनने को लेकर उनकी सराहना की गई और एकेडमी की पत्रिका में उनकी तस्वीर भी छापी। स्कूल के समय से ही वह एविएशन से संबंधित आर्टिकल्स का कलेक्शन करती थी और एयरक्राफ्ट की तस्वीरें भी रखती थीं। 

तब उसके सपनों को लेकर लोग खिल्ली भी उड़ाते थे। 12वीं पास करने के बाद उर्दू दैनिक सियासत की ओर से इंजीनियरिंग प्रवेश के लिए करवाई जा रही कोचिंग में उन्होंने दाखिला ले लिया। 2007 में आंध्र प्रदेश एविएशन एकेडमी में दाखिला पाया। वह तीन बार नेविगेशन पेपर में फेल हुई रहीं, लेकिन सियासत के एडिटर जाहिद खान की ओर से मिल रहे प्रोत्साहन से वह अपने लक्ष्य को हासिल करने के प्रयास में जुटी रही। 5 साल बाद उन्होंने सेसना 152 एयरक्राफ्ट से 200 घंटों की उड़ान पूरी की जिसमें 123 घंटे अकेले विमान उड़ाने का अनुभव भी शामिल है।